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बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ये बड़ा कदम उठाने जा रही उत्तराखंड सरकार

Wed, 15 Nov 2017 10:16 AM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 15 Nov 2017 10:16 AM IST
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Rising pollution Uttarakhand government took a decision
प्रदूषण

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए उत्तराखंड सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में 15 साल पुराने करीब पांच लाख वाहनों पर प्रतिबंध लग सकता है। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार बढ़ रहे वाहनों के चलते बिगड़ते प्रदूषण के स्तर को देखते हुए यह संस्तुति शासन को भेजने की तैयारी कर रहा है।

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बोर्ड ने पॉल्यूशन कंट्रोल रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीसीआरआई ) से हरिद्वार और देहरादून जिले की वायु गुणवत्ता का अध्ययन कराया है, जिसमें पाया गया कि दोनों जिलों के वातावरण में धूल के कणों (धुंध) का स्तर दो गुना तक पहुंच गया है। इसके अलावा सल्फर डाइऑक्साइड जैसे तत्वों की मात्रा भी बढ़ती जा रही है।
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पीसीआरआई की रिपोर्ट के आधार पर ही बोर्ड पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाने की कवायद आगे बढ़ाने जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उक्त दोनों जिलों की आबोहवा की स्थिति जानने के साथ ही इसमें सुधार के लिए एक्शन प्लान बनाने के उद्देश्य से पीसीआरआई से यह अध्ययन कराया है।
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पीसीआरआई ने सोमवार को हरिद्वार जिले की ड्राफ्ट रिपोर्ट सौंप दी है, जबकि देहरादून की रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसे 20 नवंबर को देने की तैयारी है।

 

देहरादून के आईएसबीटी के पास धुंध की स्थिति दिल्ली जैसी

Rising pollution Uttarakhand government took a decision
धुंध - फोटो : demo pic

वैज्ञानिकों के अनुसार, देहरादून के आईएसबीटी के पास धुंध की स्थिति दिल्ली जैसी हो गई थी। इसके अलावा हरिद्वार जिले में भी धुंध का स्तर दो गुना हो चुका है। दोनों जिलों के वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड भी खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी है। अगर समय रहते कुछ एहतियातन कदम

उठाये जाएं तो प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम किया जा सकता है। इसमें राज्य में 15 साल पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल है। अगर डेढ़ दशक पुराने वाहनों के संचालन पर रोक लगती है तो प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।

इसकी संस्तुति बोर्ड मीटिंग में तय करने के बाद की जा सकती है। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, उद्योग विभाग, ट्रैफिक पुलिस आदि भी क्या कदम उठा सकते हैं? उनके कार्य और जिम्मेदारी से जुड़ी संस्तुति भी की जाएगी।

पुराने वाहनों से जहरीली गैस का उत्सर्जन ज्यादा
वाहनों से जहरीली गैस का उत्सर्जन कम करने के लिए यूरो-1 से लेकर यूरो-4 मानक लागू किए गए हैं। उसी के आधार वाहन संचालित हो रहे हैं। जो पुराने वाहन हैं, उनमें जहरीली गैस का उत्सर्जन ज्यादा होता है।

पुराने वाहन रूट से हटते हैं, तो वातावरण में जहरीली गैस कम पहुुंचेंगी। वहीं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली में प्रदूषण में कमी लाने के लिए 10 साल पुराने डीजल वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी थी।

कुल वाहन 25 लाख, प्रदूषण जांच की पुख्ता व्यवस्था नहीं

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Pollution
राज्य गठन के समय प्रदेश में वाहनों की संख्या चार लाख पांच हजार थी। इसमें तेजी से वृद्धि हुई। 17 सालों में वाहनों की संख्या करीब 25 लाख पहुंच गई है, जबकि परिवहन विभाग के पास प्रदूषण की जांच की कोई पुख्ता व्यवस्था तक नहीं है। निजी क्षेत्र के सहयोग ही काम चलाया जा रहा है।

मैदानी रूट पर 20 साल की अनुमति देता है परिवहन विभाग
मौजूदा समय में मैदानी रूट पर स्टेट कैरिज वाहन (बस)  संचालन के लिए 20 साल और पर्वतीय रूट पर 15 साल की अनुमति परिवहन विभाग देता है। नियमों के हिसाब से निजी वाहनों को 15 साल के बाद आरटीओ/एआरटीओ कार्यालय में वाहन को प्रस्तुत करना होता है। अगर वाहन की स्थिति बेहतर होती है, तो वाहन चलाने की अनुमति प्रदान की जाती है। पर इसका पालन तुलनात्मक तौर पर कम ही हो पाता है।

इन जगहों पर किया गया अध्ययन
बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसएस पाल के अनुसार पीसीआरआई की टीम ने देहरादून में घंटाघर, आईएसबीटी, एफआरआई और हरिद्वार में चंडीघाट समेत सात जगहों पर अध्ययन किया है। इसमें ट्रैफिक लोड, एयर क्वालिटी मानीटरिंग

स्टेशन के माध्यम से हवा में मौजूद तत्वों की मात्रा का अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन अप्रैल से अगस्त के बीच किया गया है। अब पीसीआरआई को हरिद्वार में रेलवे स्टेशन, मनसा देवी के आसपास के क्षेत्र में भी अध्ययन करने

का अनुरोध किया गया है। अध्ययन की अवधि फरवरी तक बढ़ा दी गई है। देखा गया है कि वाहनों की बढ़ती संख्या, वाहनों की धीमी रफ्तार, सड़क पर गड्ढे, भवन निर्माण, खुले में कूड़ा जलाने आदि से प्रदूषण बढ़ा है।

पीसीआरआई ने प्रारंभिक रिपोर्ट दी है। इसमें कुछ तथ्य सामने आएं हैं। बहरहाल, संस्था विस्तृत और फाइनल रिपोर्ट देेगी। उसके बाद बोर्ड की मीटिंग कर संस्तुतियों को अंतिम रूप देकर शासन को भेजा जाएगा। पूरा प्रयास होगा कि प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं जाएं। - एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व सीसीएफ
 
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