विदेश में बुझ गया तीर्थनगरी का चिराग
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यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) में मीरानगर निवासी एक युवक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वह वहां रस-एल खेमा शहर के एक होटल में नौकरी करता था। घटना की सूचना के बाद से परिजन और रिश्तेदारों में कोहराम मच गया है।
पुत्र की मृत्यु से बुरी तरह से आहत माता-पिता ने केंद्र और प्रदेश सरकार से बेटे का शव शीघ्र घर लाने के लिए मदद की गुहार लगाई है।
गली नंबर-01, मीरानगर निवासी आशीष कंडवाल (28) पुत्र मोहनलाल कंडवाल करीब दस माह पहले यूएई गया था और वहीं एक होटल में नौकरी कर रहा था। परिजनों द्वारा बताया जा रहा है कि सोमवार रात होटल से कमरे पर लौटते समय सड़क पार करते हुए उसे एक वाहन ने टक्कर मार दी। जिससे उसकी मौत हो गई।
घटना की जानकारी बीती देर रात युवक के साथ होटल में काम करने वाले दूसरे युवक ने उसके भाई को दी। मंगलवार सुबह से ही मीरानगर स्थित उनके घर पर पड़ोसियों और नाते रिश्तेदारों का तांता लग गया। उन्होंने घटना के प्रति दुख प्रकट करते हुए शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया।
विधायक प्रेमचंद अग्रवाल और भाजपा जिलाध्यक्ष ज्योति सजवाण भी युवक के घर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। मृतक के पिता मोहनलाल कंडवाल ने विधायक और सरकार से बेटे का शव शीघ्र घर लाने के लिए प्रक्रिया शुरू करने की गुहार लगाई है।
एंबेसी से नहीं मिली सूचना
आशीष के पिता मोहनलाल कंडवाल ने बताया कि बेटे की मौत की सूचना अभी तक इंडियन एंबेसी अथवा सरकार के माध्यम से उन्हें नहीं मिली है। सूचना युवक के दोस्त ने परिजनों को दी।
जाने के बाद एक बार भी नहीं लौटा था घर
बेटे को होटल मैनेजमेंट (एचएम) कराने के बाद सेवानिवृत्त फौजी पिता मोहनलाल कंडवाल और मां मुन्नी देवी उसके सुनहरे भविष्य के सपने संजोए बैठे थे। सोचा था कि बेटा बुढ़ापे में उनका सहारा बनेगा, मगर शायद नियति को यह मंजूर नहीं था।
मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे आशीष ने करीब दो साल पहले दून स्थित एक शिक्षण संस्थान से एमएच किया था। कुछ समय वह काम की तलाश में घूमता रहा। इसके बाद उसे यूएई जाने का मौका मिल गया और वह फरवरी- 2014 में विदेश चला गया।
माता-पिता ढूंढ रहे थे दुल्हन
दो भाई-बहन में सबसे बड़े बेटे के विदेश में नौकरी के बाद माता-पिता उसके हाथ पीले करने की तैयारी में थे। आशीष के जीजा एसएल बडोला ने बताया कि उसकी शादी के लिए लड़की की तलाश की जा रही थी। कुछ महीने में आशीष के घर लौटने के बाद शादी का प्रस्ताव उसके सामने रखा जाना था।
बीमार हैं पिता
आशीष के पिता मोहनलाल कंडवाल बीमार हैं, उनका उपचार भी चल रहा है। आर्मी से रिटायरमेंट के बाद परिवार का भरण पोषण करने के लिए वह स्वामीराम साधक ग्राम संस्था में सुरक्षाकर्मी की नौकरी करते हैं। रिश्तेदारों ने बताया कि आशीष ही उनका सहारा था।