Dehradun: बेटियों को हिम्मत, धैर्य और गौरव का पाठ पढ़ा रहीं 11 महिलाएं, RIMC में इस साल पास होगा छठा बेच
आरआईएमसी सामान्य विद्यालयों से अलग है क्योंकि यहां छात्राओं को न सिर्फ पढ़ाई कराई जाती है बल्कि उन्हें हिम्मत, धैर्य और गौरव का भी पाठ पढ़ाया जाता है, जो कैडेट छात्राओं को सैन्य अधिकारी बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) में देश भर की बेटियां न सिर्फ सैन्य अधिकारी बनने के लिए पढ़ाई कर रहीं हैं बल्कि 11 महिला शिक्षिकाओं की टोली उन्हें हिम्मत, धैर्य और गौरव का भी पाठ पढ़ा रही हैं। इस साल आरआईएमसी से बालिकाओं का छठा बेच पासआउट होगा।
दून में स्थित आरआईएमसी का इतिहास 100 साल से ज्यादा पुराना है, इस संस्थान की स्थापना सन 1922 में हुई थी। साल 2022 से संस्थान में पहली बार छात्राओं के प्रवेश को भी हरी झंडी मिली थी। आरआईएमसी की अकादमिक समन्वयक लेफ्टिनेंट कमांडर संगीता सेहरावत ने कहा, यह स्कूल सामान्य विद्यालयों से इसलिए भी अलग है क्योंकि यहां छात्राओं को न सिर्फ पढ़ाई कराई जाती है बल्कि उन्हें हिम्मत, धैर्य और गौरव का भी पाठ पढ़ाया जाता है, जो कैडेट छात्राओं को सैन्य अधिकारी बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, महिलाओं के लिए कोई विशेष दिन बनाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि लैंगिक समानता के प्रति लोगों को जागरूक करना होगा। वहीं, आरआईएमसी की प्रथम महिला
सिल्वी अग्रवाल, रसायन विज्ञान विषय की शिक्षका तैयबा खातून, नीति भाटिया, हिंदी विषय की शिक्षिका हीना पंड्या, अंग्रेजी की शिक्षिका अल्पना गिरी, अरुणा शर्मा, निकिता ज्ञान चंदानी, पीटीआई शशि शर्मा, काउंसलर अदिति शाह और वार्डन राखी ने कहा, यह गर्व की बात है कि हम भविष्य में देश की सुरक्षा करने वाली छात्राओं को अनुशासित बनाते हैं। कहा, संस्थान में देश भर से आने वाली बालिकाओं की क्षमता और उपलब्धियों को प्रोत्साहित किया जाता है। महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं की आध्यात्मिक, शैक्षिक, सामजिक, राजनैतिक और आर्थिक शक्ति में वृद्धि करना, बिना इसके महिला सशक्तिकरण असंभव है।
हम में है देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने की हिम्मत
आरआईएमसी की कैडेट छात्राओं ने कहा, पुरुषों की तरह उनमें महिलाओं में भी देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने की हिम्मत है। हरियाणा की कैडेट गार्गी आर्य ने कहा, हमारा देश की सेना में भागीदारी से सुरक्षा की जड़ें मजबूत होंगी। वहीं, कैडेट शरवी ने कहा, गुजरात की आर्य, हंसिका और मणिपुर की अनुष्का ने कहा, महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरषों से कम नहीं है। महिलाओं की शक्ति व सम्मान सामाजिक स्थिति को दर्शाती है।
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आरआईएमसी की बालिका कैडेट ने खुद को खोज आगे बढ़ी हैं और महिलाएं भी पुरुषों की तरह सेना में कमांड पोस्ट संभाल सकती हैं। यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद बालिका कैडेट देश सुरक्षा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका तो निभाएंगी साथ ही समाज की अन्य बालिकाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बनेंगी। -कर्नल राहुल अग्रवाल, कमांडेंट, आरआईएमसी