पिता की लाइसेंसी बंदूक से खुद को मारी गोली, सरकारी नौकरी पाने में नहीं हो पा रहा था सफल
- परिजनों ने बताया कि काफी प्रयासों के बाद भी सरकारी नौकरी में सफल नहीं होने से था तनाव में
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उत्तराखंड के रुद्रपुर में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के रिटायर्ड एएसआई के बेटे ने तनाव के चलते पिता की लाइसेंसी बंदूक से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था और लगातार प्रयासों के बावजूद सफल नहीं होने की वजह से तनाव में था। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
मूल रूप से कसार बैंड धौलछीना अल्मोड़ा निवासी दीवान लाल कई साल से ग्राम भगवानपुर में परिवार के साथ रहते हैं। वे सीआईएसएफ से डेढ़ साल पहले ही रिटायर हुए हैं। सोमवार रात खाना खाने के बाद परिजन अपने-अपने कमरों में चले गए थे। इसी बीच एक कमरे से परिजनों ने गोली चलने की आवाज सुनी तो सभी भागकर मौके पर पहुंचे। कमरे में उनका बेटा प्रभात जागेश्वरी (29) मृत पड़ा था। प्रभात ने पिता की लाइसेंसी डबल बैरल बंदूक से कनपटी में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।
सूचना पर कोतवाल केसी भट्ट फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। पोस्टमार्टम हाउस में गमगीन पिता दीवान लाल ने बताया कि प्रभात ने एमकॉम किया था। वह सरकारी नौकरी के लिए तैयारियां करने के साथ ही परीक्षा दे रहा था। वह दो बार पीसीएस की परीक्षा दे चुका था, लेकिन कम नंबरों से चयन होने से रुक जाता था।
इस वजह से प्रभात तनावग्रस्त रहता था। उसका हल्द्वानी से उपचार भी चल रहा था। तनाव की वजह से ही उसने आत्मघाती कदम उठाया होगा। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को शव सुपुर्द कर दिया गया। कोतवाल भट्ट ने बताया कि युवक ने तनाव के चलते आत्महत्या की है। मृतक के पास कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
तीन साल पहले प्रभात की हुई थी शादी
तनाव के चलते आत्मघाती कदम उठाने वाले प्रभात की तीन साल पहले मीनाक्षी से शादी हुई थी। उसका डेढ़ साल का पुत्र सिद्धार्थ भी है। बेरोजगारी से परेशान प्रभात को उसके पिता ने कार भी खरीदकर दी थी और व्यापार में भी पूरा मदद करने की बात कही थी, लेकिन तमाम कोशिश के बाद भी नौकरी नहीं लगने की टीस ने प्रभात को तनावग्रस्त बना दिया था। मृतक तीन भाई बहनों में सबसे बड़ा था। छोटा भाई श्रेष्ठ हाईस्कूल में पढ़ता है।
आत्महत्या से पहले की थी मां की सेवा
प्रभात का अपनी मां कमला देवी से बेहद लगाव था। सोमवार रात खाना खाने के बाद प्रभात ने मां से काफी देर तक बात की थी और दर्द होने पर मां के पैर भी दबाए थे। मां ने उसे नौकरी नहीं लगने पर तनाव नहीं लेने के लेकर काफी समझाया था। लेकिन प्रभात ने आत्मघाती कदम उठाने की सोच लिया था। इसी के चलते मां के सोने के बाद उसी कमरे में दीवार पर टंगी बंदूक निकालने के बाद प्रभात ने दूसरे कमरे में जाकर खुद को गोली मारी थी।