गजब, एक बार नहीं तीन बार मरा यह रिटा. अधिकारी
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देहरादून स्थित भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के एक रिटायर्ड अधिकारी जियालाल की एक बार नहीं तीन बार मौत हुई।
बाकायदा उनके मृत्यु के तीन प्रमाण पत्र जारी हो गए हैं। इनमें से एक प्रमाण पत्र परिजनों ने बनवाया, जबकि संपत्ति हड़पने के लिए दो प्रमाणपत्र एक शख्स ने बनवा लिए।
बेटी को अब पिता की मौत की सही तारीख साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मृत्यु के दो प्रमाणपत्र और सामने आए
आरके पुरम, सहारनपुर निवासी पुष्पा देवी की मानें तो उनके पिता जियालाल की मौत 31 मार्च 1986 को हुई थी।
उनके आवेदन पर 15 मार्च 2013 को मोहकमपुर खुर्द ग्राम पंचायत ने प्रमाणपत्र जारी किया, लेकिन इसमें मृत्यु की तारीख 1 अप्रैल 1986 दिखाई गई।
उधर, जियालाल की मृत्यु के दो प्रमाणपत्र और सामने आए हैं। ग्राम सभा आरकेडिया ग्रांट ने 4 नवंबर 2006 को भगवती प्रसाद नाम के एक शख्स को जारी किए प्रमाणपत्र में जियालाल की मौत 12 अप्रैल 2005 को दशाई है।
मौत बड़ोवाला में दिखाते हुए भगवती प्रसाद ने वसीयत के आधार पर उनकी जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। पुष्पा देवी ने आपत्ति जताते हुए कोर्ट का सहारा लिया।
इस प्रमाण पत्र को फर्जी मानते हुए कोर्ट ने आरोपी भगवती को जेल भेज दिया।
कानूनी पेचीदगी में फंसकर रह गया मामला
आरकेडिया ग्रांट से ही एक और प्रमाणपत्र जारी हुआ है। इसमें मौत की तारीख 25 जून 1972 दर्शाई गई है। ऐसे में यह मामला कानूनी पेचीदगी में फंसकर रह गया है।
जियालाल की बेटी पुष्पा पिता की मौत के प्रमाण पत्र के खेल को लेकर आहत है। सरकारी महकमे में पूरा रिकार्ड होने के बाद भी जालसाजी पर विराम नहीं लग पा रहा है।
उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराकर साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।