तीन दिन बुखार के बाद छात्र की हॉस्टल में मौत
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देहरादून के त्यूनी में सरकारी आवासीय विद्यालय के कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से एक मासूम की जान चली गई। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र को तीन दिन से बुखार था। स्कूल स्टाफ ने न तो उसे दवा दी, न अस्पताल ले गया और न ही परिजनों को जानकारी दी।
हालत अधिक खराब होने पर छात्र के छोटे भाई ने तीसरे दिन परिजनों को बताया। सूचना मिलने के एक दिन बाद छात्र के परिजन स्कूल पहुंचे तो उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी।
परिजन छात्र को लेकर अस्पताल जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने स्कूल में आकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि विद्यालय के स्टाफ की लापरवाही से उनके बेटे की मौत हो गई। मामले में अब जांच की बात कही जा रही है।
आश्रम पद्धति विद्यालय बिनसोन में दिनेश (12) पुत्र पूरचंद निवासी पिंगुवा (भरम खत) कक्षा पांचवीं में पढ़ता था। बताते हैं कि वह तीन दिन से बुखार से पीड़ित था। लेकिन स्कूल के स्टाफ ने उसका प्राथमिक उपचार कराने की भी जरूरत नहीं समझी। यही नहीं परिजनों को भी उसके बीमार होने की खबर नहीं दी।
सोमवार को उसी स्कूल में पढ़ रहे दिनेश के छोटे भाई सचिन ने परिजनों को फोन कर उसके बीमार होने की सूचना दी। लेकिन परिजन भी एक दिन बाद मंगलवार को स्कूल पहुंचे।
तीन दिन तक तपता रहा, अस्पताल ले जाते वक्त मौत
जब परिजन स्कूल पहुंचे उस समय दिनेश छात्रावास में सो रहा था और उसका शरीर बुखार से तप रहा था। परिजन उसे उपचार के लिए चकराता ले जाने लगे, लेकिन स्कूल से महज आधा किमी दूर जाने के बाद उसने दम तोड़ दिया।
इसके बाद परिजन छात्र का शव को लेकर स्कूल पहुंचे और जमकर हंगामा किया। दिनेश के पिता पूरचंद ने आरोप लगाया कि बेटे के बीमार होने की जानकारी स्कूल प्रबंधन ने नहीं दी। बीमार छात्र का उपचार भी नहीं कराया। कुछ देर हंगामा करने के बाद परिजन शव को लेकर लौट गए।
स्कूल के प्रभारी अधीक्षक कृष्णलाल ने पूरचंद के आरोपों को निराधार बताया। कहा कि सोमवार तक छात्र ठीक था, लेकिन मंगलवार को उसकी अचानक तबियत खराब हो गई। वह उल्टी करने लगा।
कहा सुबह फोन पर परिजनों को इसकी जानकारी दी थी। लेकिन किसी छात्र के प्राथमिक उपचार और अस्पताल ले जाने की बात से वह भी इनकार करते हैं। दिनेश पांच भाई बहनों में तीसरे नंबर का था। बेटे को खोने की खबर के बाद से मां दयालो देवी सदमे में हैं।
स्कूल प्रशासन ने दिए शर्मनाक तर्क
पांचवीं के छात्र दिनेश की बीमारी के बारे में जिम्मेदारों के हास्यास्पद तर्क सामने आए हैं। स्कूल के प्रभारी अधीक्षक कृष्णलाल का कहना है कि छात्र की तबीयत मंगलवार को अचानक खराब हुई और इसकी जानकारी परिजनों को दे दी गई थी। लेकिन वह यह नहीं बता पाए कि जब छात्र छात्रावास में रह रहा है तो उसके उपचार की जिम्मेदारी उनकी थी।
वह छात्र को अस्पताल क्यों नहीं ले गए। यदि अस्पताल नहीं ले गए तो उसका प्राथमिक उपचार भी क्यों नहीं कराया। इसी तरह स्कूल की प्रधानाचार्य मालती विजयलक्ष्मी कहती हैं कि मेरे पास चार स्कूलों का चार्ज है।
प्रभारी अधीक्षक ने घटना की जानकारी मुझे नहीं दी। वार्डन से मुझे घटना का पता चला। बुधवार को स्कूल जाकर जांच करूंगी।
चार स्कूलों का चार्ज है तो क्या बच्चों के बीमार पड़ने पर उनका इलाज नहीं किया जाएगा? इस सवाल का जवाब मैडम के पास भी नहीं था।
स्कूल में नौ साल से फार्मेसिस्ट का पद खाली
दिनेश की मौत के संबंध में फिलहाल जो तथ्य सामने आए हैं उससे यही लगता है कि मामले में घोर लापरवाही की गई है। सरकारी सिस्टम की काहिली के चलते एक मासूम इस दुनिया से चला गया। समय रहते उसे इलाज मिल जाता तो उसकी जान बच जाती। दिनेश की मौत से दूसरे छात्र भी सदमे में हैं।
बताते हैं कि आश्रम पद्धति विद्यालय बिनसोन में पहले एक फार्मेसिस्ट का पद स्वीकृत था। इस पद को दो साल पहले खत्म कर दिया गया। स्कूल में कक्षा एक से पांच तक 161 छात्र पढ़ते हैं और वहीं रहते हैं।
आवासीय विद्यालय होने के कारण यहां हमेशा फार्मेसिस्ट की जरूरत पढ़ती है। किसी छात्र के बीमार होने पर उसे इलाज के लिए 40 किमी दूर चकराता ले जाना पड़ता है।
यहां भी छात्र राम भरोसे
चकराता प्रखंड में कुल चार आश्रम पद्धति विद्यालय बिनसोन, लाखांपोखरी, लाखामंडल और त्यूनी हैं। लेकिन केवल लाखामंडल में ही फार्मेसिस्ट तैनात हैं, जबकि दूसरे स्कूलों में लंबे समय से फार्मेसिस्ट की तैनाती नहीं की गई है। ऐसे में किसी छात्र के बीमार होने पर उसे समय पर उपचार नहीं मिल पाता।
दो साल पूर्व सभी फार्मेसिस्ट के पद समाप्त कर दिए गए हैं। किसी बच्चे के बीमार होने पर 108 सेवा का सहारा लिया जाता है। स्कूल प्रबंधन को भी 108 की सेवा लेनी चाहिए थी। मामले की जांच कराई जाएगी।
-योगेंद्र रावत, संयुक्त निदेशक जनजातीय कल्याण।