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प्रमोशन में आरक्षण : सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में उत्तराखंड सरकार

Fri, 11 Oct 2019 12:22 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 11 Oct 2019 12:22 PM IST
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Reservation in promotion: Uttarakhand government in preparation for going to Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

प्रदेश सरकार प्रमोशन में आरक्षण को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय की डबल बेंच के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जाने की तैयारी में है। लेकिन इससे पहले वह हाईकोर्ट में दाखिल अपनी पुनर्विचार याचिका वापस होने का इंतजार कर रही है। न्यायालय से याचिका वापस होने के साथ ही सरकार उच्चतम न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दाखिल कर सकती है।

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आधिकारिक सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। उधर, आरक्षित और अनारक्षित श्रेणी के कर्मचारियों से जुड़े संगठनों के बीच भी सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर तू डाल-डाल मैं पात-पात के हालात हैं। उत्तराखंड एससी एसटी इम्पलाइज फेडरेशन की निगाह भी उच्च न्यायालय में प्रदेश सरकार की रिव्यू पिटीशन की वापसी पर है। ऐसे संकेत हैं कि सरकार के सर्वोच्च न्यायालय में जाने से पहले ही फेडरेशन या फेडरेशन से जुड़े कार्मिक उच्चतम न्यायालय में केविएट दाखिल कर उनका पक्ष सुने जाने की अपील कर सकते हैं।
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प्रदेश सरकार ने ज्ञानचंद बनाम राज्य सरकार मामले में उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल कर रखी है। एक अप्रैल 2019 को ज्ञानचंद की याचिका पर संयुक्त पीठ ने पदोन्नति में आरक्षण पर लगी रोक के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी। इस बीच कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने सभी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, शिक्षण संस्थानों में डीपीसी की बैठकों और पदोन्नतियों पर रोक लगा दी थी।
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तब से प्रदेश में पदोन्नतियों पर रोक है, जिससे प्रमोशन की राह देख रहे अधिकारियों व कर्मचारियों में भारी हताशा है। सरकार पर भी प्रमोशन पर लगी रोक हटाने का लगातार दबाव बन रहा है। इस बीच सरकार ने उच्च न्यायालय में दाखिल पुनर्विचार याचिका को वापस लेने का अनुरोध कर दिया है। याचिका वापस होने पर सरकार का इरादा उच्चतम न्यायालय जाने का है। लेकिन सरकार के इन इरादों की भनक आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को भी लग गई है। सूत्रों की मानें तो वे सरकार से पहले केविएट दाखिल करने की तैयारी कर चुके हैं।

लोनिवि : जेई से ऊपर के इंजीनियरों में बेचैनी

लोक निर्माण विभाग में सर्वोच्च न्यायालय से स्टे मिल जाने के बाद जूनियर इंजीनियरों के प्रमोशन की राह तो खुल गई है, लेकिन उससे ऊपर के इंजीनियरों के तबादलों पर अब भी रोक है।  विनोद कुमार बनाम राज्य सरकार एवं अन्य का मामला लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियरों की पदोन्नति से संबंधित था। इस लिहाज से उच्चतम न्यायालय का स्थगनादेश के दायरे में केवल जूनियर इंजीनियर आ रहे हैं।


इसका लाभ उनसे ऊपर की श्रेणी के इंजीनियरों को नहीं मिलेगा। इस कारण विभाग के अन्य इंजीनियरों में बेचैनी का आलम है। कई एई, एक्सीईएन, एसई, चीफ इंजीनियर पद पर तैनात कई अभियंता ऐसे हैं जिनकी पदोन्नतियां होनी है। एसई और चीफ इंजीनियर पद पर कुछ इंजीनियर ऐसे भी हैं जो एक दो महीने में रिटायर हो जाएंगे।

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