उत्तराखंडः प्रमोशन में आरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
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प्रमोशन में आरक्षण के मामले में लंबी बहस के बाद सर्वोच्च न्यायालय फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब प्रदेश के हजारों कर्मचारियों को फैसला आने का इंतजार है। प्रमोशन में आरक्षण और उसके विरोध में अदालती लड़ाई लड़ रहे कर्मचारी संगठन अपने अपने हक में फैसला आने की उम्मीद कर रहे हैं। न्यायालय में सरकार ने अपना रुख पूरी तरह से साफ कर दिया कि वह प्रमोशन में आरक्षण देने के पक्ष में नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड सरकार की स्टैंडिंग काउंसिल वंशजा शुक्ला के मुताबिक, बुधवार को सरकार की ओर से सीनियर वकील मुकुल रोहतगी और पीएन नरसिम्हा ने पैरवी की। सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक चली बहस के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रख लिया। सरकार की ओर से अदालत में सरकार का तर्क था कि वह प्रमोशन में आरक्षण नहीं देना चाहती, इसलिए उसे आंकड़े जुटाने की आवश्यकता नहीं है।
प्रमोशन से रोक हटाने को लेकर बनेगी रणनीति
उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन की पहल पर कर्मचारी संघों परिसंघों के पदाधिकारियों की बनी हाईपावर कमेटी की बैठक बृहस्पतिवार को होगी। इस बैठक में प्रमोशन पर लगी रोक हटाने को लेकर रणनीति पर मंथन होगा। एसोसिएशन की नजर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर लगी थी। लेकिन न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बैठक में हाई पावर कमेटी सरकार से यह मांग कर सकती है कि अदालत के फैसले के अधीन तत्काल प्रभाव से डीपीसी पर लगी रोक को हटाया जाए और लंबे समय से लटके प्रमोशन किए जाएं।
फैसला आने की पूरी आशा
पांच नवंबर 2012 को सरकार ने प्रमोशन में आरक्षण न देने को लेकर व्यवस्था दी। उच्च न्यायालय यह नहीं कह सकता कि आंकड़े जुटाओ। उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, एडवोकेट दुष्यंत दबे और कोलविन गोंजाल्विस व अन्य वकीलों ने प्रमोशन के आरक्षण के पक्ष में तर्क रखे।
सरकार और हमारे वकीलों ने सर्वोच्च अदालत में मजबूूती के साथ पक्ष रखा। हमें पूरा भरोसा है कि फैसला जनरल ओबीसी के पक्ष में आएगा। प्रमोशन में आरक्षण देना न देना सरकार का अधिकार क्षेत्र है।
-दीपक जोशी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन
सर्वोच्च अदालत में हमारे वकीलों ने मजबूती के साथ तर्क रखे। सरकार को उच्च न्यायालय के फैसले के अनुरूप एससी एसटी कर्मचारियों के आंकड़े जुटाने चाहिए और उस आधार पर प्रमोशन में आरक्षण देना चाहिए। हमें अपने पक्ष में फैसला आने की पूरी आशा है।
- करम राम, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड एसी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन