पंचायत चुनाव में आरक्षण पर घमासान

अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 25 Nov 2013 08:57 AM IST
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उत्तराखंड में होने वाले पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण पर घमासान बढ़ता जा रहा है। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने अपने स्तर पर कराए ओबीसी सर्वे में मनमाना फेरबदल कर सीटें आरक्षित कर दी हैं।
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फायदा पहुंचाने के लिए खेल
आरोप है कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए खेल किया गया है। जनप्रतिनिधियों ने आरक्षण पर आपत्ति दाखिल करने के साथ ही कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
डीपीआरओ कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष शिवप्रसाद देवली बताते हैं कि कुछ समय पूर्व हुए ओबीसी सर्वे में आरकेडिया ग्रांट में ओबीसी की जनसंख्या 39.85 प्रतिशत बताई गई है।

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इस आधार पर यहां जिला पंचायत की सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित होनी चाहिए थी। लेकिन प्रशासन ने ओबीसी की आबादी 31.12 प्रतिशत दर्शाकर सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित कर दी।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमाल सिंह का कहना है कि जिले में ओबीसी के रैपिड सर्वे के दौरान कर्मचारी हड़ताल पर थे। आरोप लगाया कि प्रशासन ने कर्मचारियों द्वारा आंकड़े जमा कराने से पहले ही आरक्षण लागू कर दिया।

एक भी एसटी नहीं, सीट आरक्षित
‘साहब क्षेत्र में अनुसूचित जाति का एक भी परिवार नहीं है फिर भी वार्ड को अनुसूचित जाति महिला आरक्षित कर दिया गया। यह सीट अनारक्षित की जाए।’ डीपीआरओ कार्यालय पहुंचे कंडोली ग्रामसभा के वार्ड नौ निवासी प्रदीप कुमार बिष्ट ने इस तरह अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

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इसी तरह कई अन्य क्षेत्रों से भी लोग आपत्तियां दर्ज कराने पहुंचे। शनिवार को पूरे दिन डीपीआरओ कार्यालय में आपत्तियां दर्ज कराने वालों का तांता लगा रहा। सबसे अधिक 186 आपत्तियां सहसपुर से आईं। आपत्ति करने वाले पुरुषों ने सीटों को अनारक्षित करने की, जबकि महिलाओं ने आरक्षित करने की मांग की है।

मौजूदा आरक्षण पर आपत्तिकारों ने तरह-तरह की खामियां गिनाई हैं। रायपुर ब्लॉक के पूर्व प्रमुख खेम सिंह पाल बताते हैं कि सीटों के आरक्षण में अपनाया गया फार्मूला गलत है। ब्लॉक की द्वारा ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत दोनों सीटें अनारक्षित थीं, लेकिन अब आरक्षित कर दी गई हैं।

फिर से महिला के लिए आरक्षित
ग्राम कंडोली के किशन ने बताया कि क्षेत्र पंचायत कंडोली की सीट वर्ष 2003 में सामान्य, 2008 में महिला सामान्य थी, इस बार एसटी महिला आरक्षित हो गई है।

ग्राम डांडा खुदानेवाला के विनय चंदोला के मुताबिक वर्ष 2008 में क्षेत्र पंचायत किरसाली में महिलाओं की जनसंख्या 2597 थी, लेकिन किरसाली के स्थान पर इसे डांडा खुदानेवाला के नाम से जिला पंचायत प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित कर महिला के लिए आरक्षित किया गया।

जबकि इस बार जिला पंचायत क्षेत्र डांडा खुदानेवाला के स्थान पर इसे किरसाली जिला पंचायत निर्वाचन क्षेत्र घोषित कर नई सीट दिखाकर फिर से महिला के लिए आरक्षित घोषित कर दिया गया।

एक-एक व्यक्ति ने 12 से 20 आपत्तियां दर्ज कराई हैं। अब तक 452 आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। 25 से 27 नवंबर तक समस्त आपत्तियों का निस्तारण कर लिया जाएगा।
- एमएम खान, जिला पंचायत राज अधिकारी

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