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Uttarakhand: आदमखोर गुलदारों और घायल जानवरों से भर गए प्रदेश के रेस्क्यू सेंटर, नहीं बची जगह

Wed, 28 Jun 2023 05:44 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Wed, 28 Jun 2023 05:44 PM IST
सार

आठ गुलदार आदमखोर घोषित हो चुके हैं। अब इस सेंटर में किसी अन्य गुलदार को रखने के लिए जगह नहीं बची है। कमोबेश यही स्थिति प्रदेश के अन्य रेस्क्यू सेंटरों की है।

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Uttarakhand News State rescue center filled with man eating leopard and injured animals
पिंजरे में बंद गुलदार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के सभी एनिमल रेस्क्यू सेंटर वर्तमान में जानवरों से भर गए हैं। इनमें आदमखोर गुलदारों से लेकर विभिन्न प्रजाति के घायल जानवर शामिल हैं। चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में सबसे ज्यादा आठ आदमखोर गुलदार हैं। ये आदमखोर गुलदार और अन्य जानवर कहां जाएंगे इसके लिए फिलहाल कोई फैसला नहीं हो पाया है। वन विभाग लगातार केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से बात कर रहा है, मगर अभी वहां से कोई जवाब इसके संबंध में नहीं आया है। सबसे ज्यादा गुलदार चिड़ियापुर एनिमल रेस्क्यू सेंटर में हैं। यहां 11 गुलदार विभिन्न बाड़ों में बंद किए गए हैं। सेंटर प्रभारी अरविंद डोभाल ने बताया कि इनमें से आठ गुलदार आदमखोर घोषित हो चुके हैं। अब इस सेंटर में किसी अन्य गुलदार को रखने के लिए जगह नहीं बची है। कमोबेश यही स्थिति प्रदेश के अन्य रेस्क्यू सेंटरों की है। अल्मोड़ा, रामनगर रेस्क्यू सेंटर भी गुलदार और अन्य घायल जानवरों से भर चुके हैं।

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कालसी से पकड़े गए गुलदार का चल रहा परीक्षण
मई माह में कालसी वन प्रभाग में एक गुलदार आंगन में खेलते बच्चे को उठाकर ले गया था। इस गुलदार को भी वन विभाग ने पिंजरा लगाकर पकड़ लिया था। इसके बाद से वह चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में ही बंद है। प्रभारी अरविंद डोभाल ने बताया कि इस गुलदार की डीएनए और अन्य जांच की रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा कि यह गुलदार आदमखोर है या नहीं।
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एक गुलदार को दिखाई देता है कम
चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में दो गुलदार और हैं। इनमें एक घायल है और दूसरे चार साल के गुलदार को कम दिखाई देता है। बता दें कि चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में गुलदारों के नौ बाड़े और दो इलाज के लिए बने पिंजरे हैं। हालात ये हैं कि इन पिंजरों में भी गुलदारों को रखा गया है।

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चिड़ियाघर में भी नहीं जा सकते हैं आदमखोर गुलदार
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक आदमखोर गुलदारों को चिड़ियाघरों में भी नहीं भेजा जा सकता है। इसका कारण है कि ये गुलदार लोगों को देखकर बाड़ों में गुस्सा हो जाते हैं। इससे उन्हें खुद को भी नुकसान होता है।

अल्मोड़ा में भी नौ गुलदार, अभी रिपोर्ट का इंतजार
अल्मोड़ा रानीबाग में भी वन विभाग का रेस्क्यू सेंटर हाउसफुल है। यहां पर नौ गुलदार, दो बाघ के शावक और हिरन के बच्चों को रखा गया है। यहां के वेटनरी डॉक्टर डॉ. तरुण कुमार ने बताया कि इन नौ गुलदारों को लोगों पर हमले के मामले आने के बाद पिंजरों में कैद किया गया था। इन सभी की डीएनए रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अभी रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद ही तय हो पाएगा कि ये आदमखोर हैं या नहीं।

यह बात सही है कि इस समय रेस्क्यू सेंटरों में जगह नहीं बची है। इसके लिए लगातार केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से बात चल रही है। वहां से कोई निर्णय आने के बाद ही आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
- समीर सिन्हा, मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक

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