दो साल बाद केदारनाथ मंदिर से मिट गए तबाही के निशान
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वर्ष 2013 में आई आपदा से केदारनाथ मंदिर की दीवार और मंडप के नीचे लगे पत्थरों को हुई छति पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने दुरुस्त कर दी है। अब विभाग की टीम परिसर के पत्थरों को ठीक करने में जुट गई है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दून सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. बसंत कुमार स्वर्णकार ने बताया कि केदारनाथ मंदिर का काम पूरा करने के लिए 100 दिन का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बारिश के कारण 60 दिन ही काम हो पाया।
बारिश में प्रशासन ने टीम को लौटा दिया था, बारिश रुकने के बाद ही काम हुआ। बताया कि मंदिर के दरो-दीवार और मंडल के नीचे आपदा से क्षतिग्रस्त हुए पत्थरों को दुरुस्त कर दिया है।
शिलालेख परिसर में भी होगा काम
फिलहाल परिसर के दूसरे पत्थरों को हुई क्षति ठीक की जा रही है। 40 वर्किंड डे में काम पूरा हो जाने की उम्मीद है। वहीं उन्होंने ये भी बताया कि केदारनाथ मंदिर के पत्थरों को केमिकल ट्रीटमेंट देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
केदारनाथ मंदिर का कार्य पूरा होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग कालसी में सम्राट अशोक के शिलालेख परिसर में काम शुरू करेगा।
यहां शिलालेख की स्थिति तो ठीक है, लेकिन परिसर तक पर्यटकों को पहुंचाने के लिए पहुंच मार्ग दुरुस्त किया जाना है। इसके साथ ही कार्बेट पार्क स्थित सीताबनी मंदिर में भी विभाग को काम करना है।