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क्षेत्रीय दलों को मानना होगा आप को 'बाप'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 09 Dec 2013 02:16 PM IST
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‘आप’ से सीख लेने की जरूरत कांग्रेस को ही नहीं उत्तराखंड के क्षेत्रीय दलों को भी है।
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हर चुनाव में कांग्रेस-भाजपा का विकल्प बनने की मबात कहने वाले ये दल या तो लोगों के सरोकार से नहीं जुड़ पाते या फिर आपस की लड़ाई में ही उलझ कर रह जाते हैं। लिहाजा प्रदेश में विकल्प सिरे से गायब है।
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सबक तो सीखना ही चाहिए
हाल ही में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि ‘आप’ से कांग्रेस को सबक लेना चाहिए। पर उत्तराखंड के क्षेत्रीय दलों को यह ‘आप’ से सबक तो सीखना ही चाहिए। भ्रष्टाचार, सरकार की कार्यशैली ऐसा नहीं है कि प्रदेश मे कभी चुनावी मुद्दे न बने हों।
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जन सरोकार और राज्य आंदोलन से उपजी भावनाओं के आधार पर उत्तराखंड का नवनिर्माण करने का दावा लेकर यूकेडी ने भी चुनावी ताल ठोकी थी।
पर हर बार यह दल अपने ही पचड़े में उलझ कर रह गया। दल का प्रबंधन तो सिरे से गायब हुआ ही जन सरोकार की पैरवी भी यूकेडी कभी तरीके से नहीं कर पाई।
टीपीएस रावत ने उत्तराखंड रक्षा मोरचा का गठन किया था तो फिर एक वादा किया गया था कि प्रदेश की वास्तविक जरूरत को उकेरा जाएगा। पर यह दल चुनाव के समय सक्रिय हुआ और चुनाव पूरा हा जाने के बाद नैपथ्य में चला गया।
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न तो लोगों के बीच में जाकर सीधी बातचीत की गई और न ही यह कोशिश की गई कि लोगों को विश्वास में लिया जाए। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा का विकल्प प्रदेश से सिरे से गायब ही दिखाई देता रहा।
लौटना होगा आम आदमी के पास
जनता की, जनता के लिए और जनता केद्वारा स्लोगन अब नेताओं को फिर से याद करना होगा। आम आदमी पार्टी की जीत सचमुच आम आदमी की है। क्योंकि इस पार्टी को बनाने, उसे जनता केबीच खड़ा करने वाले आम आदमी हैं।
ऐसी ही नसीहत मिली है राजनेताओं ताकि जुड़ सकें आम आदमी से। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे और टिहरी लोकसभा से प्रत्याशी रहे साकेत बहुगुणा ने कुछ घंटे में ही इसे आत्मसात कर लिया है।
देहरादून के विकासनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने खुलेआम कहा कि मैं आज आम लोगों केबीच हूं। साफ है उन्हें इस बात का अहसास है कि लंबे समय तक आम लोगों से कट कर नहीं रहा जा सकता है।
दूसरी ओर सरकार की बात करें तो कहीं न कहीं आम आदमी से दूर हुई है। मुख्यमंत्री ने पूरी ईमानदारी से जोर शोर से जनता दरबार शुरू किया था लेकिन अब नहीं लगता है।
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और आलाधिकारियों से दौरे कर लोगों की समस्याओं का निस्तारण करने को कहा था लेकिन अब वह भी नहीं दिखाई देता है। अब चुनाव नतीजे और राहुल गांधी के बदलाव के बयान से उत्तराखंड सरकार और नेताओं को आम आदमी तक पहुंचना होगा।