पाकिस्तान से लौटे 2700 रिफ्यूजी परिवारों को जमीन पर मालिकाना हक
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देहरादून के प्रेमनगर में बसाए गए रिफ्यूजी परिवारों को राज्य सरकार ने राहत दी है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने उन्हें जमीनों पर कब्जे का मालिकाना हक दे दिया है। कैबिनेट के इस निर्णय से करीब 2700 परिवारों को फायदा मिलेगा।
बता दें कि 1947 में पाकिस्तान से करीब 4000 परिवार भारत लौटे थे। उन्हें प्रेमनगर में बैरक दिए गए थे। इनमें से कई परिवार अपनी जगह व बैरक बेच कर अन्यत्र बस गए लेकिन अभी भी वहां 2700 परिवार रह रहे हैं।
सालों से संपत्ति को लेकर वहां विवाद चला आ रहा है। विस्थापितों द्वारा छोड़ी गई जमीन के आसपास कई और परिवार आ बसे। सालों कब्जा होने के बाद वे भी जमीनों पर मालिकाना हक मांग रहे हैं। 2014 में पंजाबी सर्व समाज संगठन ने रिफ्यूजी परिवारों को जमीन पर मालिकाना हक देने की आवाज उठाई।
2000 के सर्किल रेट से करा सकेंगे फ्री होल्ड
मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी समय-समय पर कई ज्ञापन सौंपे गए। कैंट सीट में कांग्रेस के उम्मीदवार रहे स्वर्गीय देवेंद्र सेठी ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। उनकी मांग पर शासन में हरकत भी हुई थी।
विधानसभा चुनाव से पूर्व एक बार फिर रिफ्यूजी परिवार के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को शासन से उठाया। मंगलवार को कैबिनेट ने सभी रिफ्यूजी परिवारों को मालिकाना हक देने का निर्णय लिया। फैसले के मुताबिक, सभी परिवार वर्ष 2000 के सर्किल रेट के हिसाब से अपनी जमीनों को फ्री होल्ड करा सकेंगे।
कैबिनेट में हुए इस फैसले पर पंजाबी सर्व समाज संगठन के अध्यक्ष इंदर मोहन, कार्यकारी दीप बोरा, जतिन्द्र तनेजा, सनी पुंज, अनिल ग्रोवर व कांग्रेस नेता नवीन जोशी ने मुख्यमंत्री व कैबिनेट का आभार प्रकट किया है।