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सड़कों के पुनर्निर्माण पर भारी पड़ी खींचतान

Fri, 28 Mar 2014 12:59 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 28 Mar 2014 12:59 AM IST
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reconstruction of road in uttarakhand

आपदा प्रभावित सड़कों के पुनर्निर्माण पर मची खींचतान के बाद देरी से शुरू हुए काम ने सरकार को दबाव में ला दिया है। निर्माण एजेंसी तय करने में सरकार ने सात माह का समय बर्बाद कर दिया।

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चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से एक माह पूर्व सड़क निर्माण बीआरओ को सौंप तो दिया गया लेकिन कुछ प्रस्ताव आचार संहिता के चलते स्वीकृति प्रक्रिया में अटक सकते हैं।
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देरी राज्य सरकार की तरफ से हुई लेकिन अपनी नाकामी छिपाने के लिए ठीकरा बीआरओ पर फूटता दिख रहा है। सड़कों को चुनावी मुद्दा बनने से रोकने के लिए सरकार ने अब पीडब्ल्यूडी को काम सौंपने का पैंतरा आजमाया है।

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बीआरओ को मिली है दो सौ करोड़ की अनुमति

reconstruction of road in uttarakhand

बीआरओ को लगभग दो सौ करोड़ रुपये रुपये की स्वीकृति केंद्रीय भूतल परिवहन एवं हाईवे विभाग की ओर से मिली है। बीआरओ को ऋषिकेश-रुद्रप्रयाग-जोशीमठ-बदरीनाथ-माणा की अनुमति मिल गई है लेकिन ऋषिकेश से धरासू-गंगोत्री मार्ग पर 92 करोड़ रुपये के पुनर्निर्माण प्रस्ताव की स्वीकृति अभी लटकी हुई है।

आचार संहिता के चलते केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय प्रस्तावों पर मुहर नहीं लगा रहा है। इसके अलावा नए निर्माण के तीन-चार प्रस्तावों को स्वीकृति मिलनी शेष है।

जिन सड़क मार्गों पर बीआरओ को स्वीकृति नहीं मिली है उनके निर्माण में देरी की संभावना को देखते हुए राज्य सरकार अब इसका जिम्मा पीडब्ल्यूडी को सौंप रही है।

सोनप्रयाग से गौरीकुंड सबसे कठिन

reconstruction of road in uttarakhand

बीआरओ ने सोनप्रयाग से गौरीकुंड के मार्ग पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए 32 करोड़ रुपये स्वीकृति हुए हैं। मार्ग पर कई किलीमीटर सड़क बह जाने से नए सिरे से निर्माण किया जाना है। संगठन चारधाम यात्रा से पूर्व मार्ग को वाहनों के लिए चालू कर देगा।

स्टोन क्रशर लगने से तेज होगा काम
बीआरओ ने प्रदेश सरकार से पांच स्थानों पर स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति मांगी है जिससे उसे रोड़ी आसानी से उपलब्ध हो सके। सैद्धांतिक तौर पर राज्य सरकार सहमति दे चुकी है लेकिन अभी तक बीआरओ को अनुमति नहीं मिल पाई है।

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