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केदारनाथ में होगी तैयारियों की 'तिमाही परीक्षा'

Mon, 19 Jan 2015 04:42 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 19 Jan 2015 04:42 PM IST
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reconstruction at kedarnath dham.

चार धाम यात्रा की तैयारी के लिए उत्तराखंड सरकार के पास वर्ष 2014 की तुलना में कम समय मिलेगा। केदारनाथ धाम में तो यात्रा सुचारु करवाने के लिए सरकार को तो तिमाही परीक्षा देनी होगी।

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कई काम अधूरे हैं, कई चुनौतियां सामने हैं। अक्षय तृतीया पर्व से धामों के कपाट खुलने शुरू होते हैं। इस वजह से संभावना है कि इस बार 21 अप्रैल तक यात्रा शुरू हो जाएगी।
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अक्षय तृतीया को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलते हैं और यात्रा शुरू हो जाती है। इसके दो-तीन दिन के अंदर ही केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट भी खुल जाते हैं। 2014 में केदारनाथ के कपाट दो मई और 2013 में कपाट 13 मई को खुले थे। इसको देखते हुए केदारनाथ के कपाट 24 अप्रैल तक खुलने की संभावना है।

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21 अप्रैल से हो रही टूर पैकेज की एडवांस बुकिंग

reconstruction at kedarnath dham.

हालांकि केदारनाथ कपाट के खुलने की औपचारिक घोषणा 24 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर की जाएगी। संभावित तिथि के आधार पर टूर आपरेटर्स ने तैयारी भी शुरू कर दी है। टूर आपरेटर्स 21 अप्रैल से टूर पैकेज की बुकिंग कर रहे हैं।

वहीं, केदारनाथ में लगातार काम जारी है लेकिन फरवरी में बर्फबारी होने की आशंका है। इससे कार्य प्रभावित होगा। ऐसे में सरकार को केदारनाथ को अतिरिक्त तवज्जो देनी पड़ेगी। क्योंकि रहने और ठहरने के लिए पर्याप्त इंतजाम अभी नहीं हो पाए हैं।

सड़क और पुलों का निर्माण अभी धरातल पर गति नहीं पकड़ पाया है। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के मुताबिक केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि घोषित होने के बाद ही तय हो पाएगा कि चार धाम यात्रा की तैयारी किस तरह से की जाएगी।

चुनौतियों का करना होगा सामना
चार धाम यात्रा का संचालन पूरी तरह निजी हाथों में ही रहने की संभावना है। सरकारी परिवहन सुविधा न के बराबर है। इस बार भी पहले की तरह ऋषिकेश से संचालित 19 कंपनियों के बेड़े का बोलबाला रहेगा।

रास्तों का हाल खस्ताहाल

reconstruction at kedarnath dham.

सिर्फ केदारनाथ के लिए यात्रियों की संख्या सीमित करने पर ही प्रदेश सरकार आगे बढ़ रही है। यात्रियों के पंजीकरण की व्यवस्था गुप्तकाशी में है और वहां सिर्फ केदारनाथ जाने वाले यात्री पहुंचते हैं।

हालांकि खुद सरकार की कोशिश है कि यात्रा में अधिक से अधिक यात्री आएं। ऐसे में ठहरने की व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। मंदाकिनी के किनारे-किनारे अधिकतर कस्बे और गांव आपदा से प्रभावित हैं और नए ढाबे, होटल फिलहाल नहीं बने हैं।

2014 की यात्रा शुरू होने से ठीक पहले सरकार ने चार धाम यात्रा की सभी सड़कों को ब्लैक टॉप किया था। पर भूस्खलन क्षेत्र का उपचार, वैकल्पिक सड़कों का निर्माण, पक्के पुलों के निर्माण का काम अभी शुरू नहीं हो पाया है।

विश्व बैंक की सहायता से 3200 करोड़ रुपए इस पर खर्च किए जाने हैं। अधिकतर परियोजनाएं अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट या निविदा के स्तर पर हैं।

वैकल्पिक मार्ग अधूरा
केदारनाथ के लिए यात्रा शुरू होने से पहले वन विभाग को वैकल्पिक मार्ग तैयार करना है। अभी इस मार्ग की रेकी ही हो पाई है। भीमबली, लिनचोली आदि स्थानों पर और वैकल्पिक मार्ग पर अस्थायी आवास बनाए जाने हैं। केदारनाथ में भी आवासीय निर्माण कार्य अभी शुरू नहीं हुआ है।

मौसम होता है खलनायक

reconstruction at kedarnath dham.

मौसम हमेशा खलनायक की भूमिका अदा करता है। इस बार बेशक एमआई-26 से भारी मशीनें केदारधाम तक पहुंचाई गई हैं। निम के लोग बड़ी तेजी से केदारनाथ में पुनर्निर्माण में जुटे हैं, मगर जब-तब मौसम बिगड़ रहा है। बर्फबारी काम में बाधक बन रही है। यह स्थिति कमोबेश पूरी फरवरी तक बनी रह सकती है और चुनौती भी।

आपदा प्रबंधन तंत्र का वही पुराना हाल है। डाप्लर रडार न होने और संचार की व्यवस्था में खास बदलाव न होने आपदा प्रबंधन पुराने ढर्रे पर ही है।

पुरोहितों के घरों का ध्वस्तीकरण
केदारनाथ में तीर्थ पुरोहितों के घरों का ध्वस्तीकरण और दूसरे स्थान पर उनका निर्माण भी आसान नहीं है। पुरोहित इसका विरोध कर रहे हैं। सरकार और पुरोहितों के बीच इस मुद्दे पर अरसे से ठनी हुई है। यात्रा से पूर्व इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला लेना भी सरकार के लिए चुनौती है।

सरकारी विभागों में तालमेल की कमी
अभी हाल में केदारनाथ में पुनर्निर्माण कर रही निम और पीडब्ल्यूडी में ठन गई। दरअसल पीडब्ल्यूडी ने केदारधाम की राह में आने वाले तीन स्टील पुलों को रुटीन की कवायद बताते हुए खोल दिया था। इससे खफा निम ने मामला मुख्यमंत्री दरबार तक उठाया था।

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