हिमालय के हिलने से नेपाल में आया जलजला
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प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक और एमओईएस (मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस) के प्रधान अन्वेषक प्रो. चारूसी पंत का कहना है कि आज का ग्रेटर हिमालय कभी पृथ्वी से 20 किलोमीटर नीचे था। पहले यह सर्फेस पर आया और आज ग्रेटर हिमालय के रूप में स्थापित है।
उन्होंने बताया कि हिमालय प्रतिवर्ष एक सेमी की रफ्तार से ऊपर उठ रहा है। एमसीटी (मेन सेंटर थ्रस्ट) के दबाव से पैदा हुई ऊर्जा से आए भूकंप के बाद इसमें और वृद्धि हुई होगी। प्रो. पंत ने यहां हुई विशेष भेंट में बताया कि पाक अधिकृत नंगा पर्वत से अरुणाचल के नमचा बरवा क्षेत्र में एमसीटी गुजरती है।
मेन सेंट्रल थ्रस्ट के रूप में जानी जाने वाली यह दरार 2500 किलोमीटर लंबी है और कई भागों में विभाजित 50 से 60 किमी चौड़ी है। शनिवार को आया भूकंप भी एमसीटी जोन में था। उन्होंने बताया कि इंडियन और एशियन प्लेट के बीच दबाव, टकराने और घर्षण से भूकंप की घटना होती है।
उत्तराखंड में 200 साल में नहीं आया ऐसा भूकंप
दबाव, टकराने और घर्षण के चलते अक्सर छोटे भूकंप आते रहते हैं, जिन्हें उपकरण तो रिकॉर्ड करते हैं, लेकिन महसूस नहीं किए जाते हैं। बीते 10 वर्ष में पांच हजार भूकंप के झटके रिकॉर्ड किए गए। अत्यधिक घर्षण होने पर बड़े भूकंप की पुनरावृत्ति होती है। कमजोर चट्टानें होने पर यह एक-दूसरे से टकराकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़ जाती हैं।
ऐसा होने पर भूकंप अत्यधिक तीव्रता से आता है और नुकसान भी काफी अधिक होता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक मैग्नीट्यूट की बढ़ोतरी पर दबाव 31.5 गुना बढ़ जाता है, जो उसी अनुपात में खतरनाक भी होता है।
प्रदेश में 200 साल में नहीं आया ऐसा भूकंप
तिथि और वर्ष - क्षेत्र - तीव्रता (मैग्नीट्यूट में)
28 अगस्त 1916 - धारचूला - 7.5
28 अक्तूबर 1937 - धारचूला-बेजांग - 7.6
28 दिसंबर 1948 - बेजांग-धारचूला - 7.5
28 अगस्त 1968 - धारचूला-बेजांग - 7.0
भारत के बड़े भूकंप
तिथि - क्षेत्र - तीव्रता (मैग्नीट्यूट में)
04 अप्रैल 1905 - कांगड़ा (हिमाचल) - 8.0
15 जनवरी 1934 - बिहार-नेपाल - 8.3
15 अगस्त 1950 - अरुणाचल - 8.5
26 जनवरी 2001 - भुज (गुजरात) - 6.9