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तो ये है भारत-चीन के बीच बाड़ाहोती के विवाद की असली वजह, नहीं संभले तो होंगे भयंकर परिणाम

Sat, 19 Aug 2017 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जोशीमठ
ब्यूरो/अमर उजाला, जोशीमठ Updated Sat, 19 Aug 2017 10:31 PM IST
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realty of barahoti dispute between india and china 

भारत और चीन के बीच बाड़ाहोती को लेकर व‌िवाद की असली वजह सामने आई है। अगर इसी तरह से लापरवाही बरती जाती रही तो चीन कभी भी भारत में घुसपैठ कर नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में अगर अभी नहीं संभले तो भव‌िष्य में भयंकर परिणाम हो सकते हैं। 

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यह बात भारत-तिब्बत मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार हरीश चंद्र चंदोला ने अमर उजाला से खास बातचीत में कही। उन्होंने कहा क‌ि चमोली से लगी चीन सीमा में भारत को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ानी चाहिए।
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चीन यहां अपने सीमा क्षेत्र गरतोक तक रेल लाइन का विस्तार कर चुका है, जबकि भारत की ओर से सीमा क्षेत्र में यातायात की समुचित व्यवस्था नहीं हो पाई है। सीमांकन न होने से भारत-चीन के बीच बाड़ाहोती स्थल आज भी विवादित स्थल है।  

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1960 से विवादित है बाड़ाहोती

realty of barahoti dispute between india and china 
Journalist Harish Chandra Chandola

वे कहते हैं कि भारत-तिब्बत (चीन) सीमा से जुड़ा बाड़ाहोती क्षेत्र वर्ष 1960 से विवादित है। आज भी यह क्षेत्र विवादित स्थल है। जिस पर भारत और चीन अपना क्षेत्र मानते हैं। इस क्षेत्र का सीमांकन न होने से आज तक दोनों देश यहां अपनी सेना चौकियां स्थापित नहीं कर पाए हैं और यह क्षेत्र आज तक विवादित है।  

वे कहते हैं कि वर्ष 1950 में चीन द्वारा तिब्बत पर अपना अधिकार जमाने के बाद वर्ष 1960 में चीन बाड़ाहोती तक पहुंच गया था। चीन की ओर से अंतिम सैन्य चौकी दापा में है। चीनी सैनिक बाड़ाहोती तक घोड़े में सवार होकर निरीक्षण के लिए आते हैं।

वर्ष 1962 में जब भारत व चीन का युद्ध हुआ तो बाड़ाहोती में दोनों देशों की सेना आमने-सामने आ गई थी। लेकिन हथियार दोनों सेनाओं ने नहीं उठाए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से चीन बार-बार बाड़ाहोती में सीमा का उल्लंघन कर रहा है, तो भारत को यहां अपनी सुरक्षा गतिविधियां बढ़ाने की जरुरत है।

चीन अपने अंतिम सरहद तक सड़क और सरहद के समीप ही गरतोक नामक स्थान तक रेल लाइन का विस्तार कर चुका है। भारत को भी सीमा क्षेत्र में सड़क, रेल व अन्य सुविधाएं जुटानी चाहिए।

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