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इस अपराधी ने पैरोल लेने में तोड़ा संजय दत्त का रिकॉर्ड

Thu, 29 May 2014 09:44 AM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 29 May 2014 09:44 AM IST
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reality of jawahar singh parihar parole

जवाहर सिंह परिहार, देहरादून कारागार का कैदी नंबर 233, हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा। एक और मामले में आठ साल का सश्रम कारावास।

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लेकिन राज्य में ऐसी कोई जेल नहीं बनी जो परिहार को बहुत दिन तक कैद कर रख सके। मई 2008 में जेल गया यह अपराधी अब तक लगभग तीस महीने का समय पैरोल पर जेल से बाहर काट चुका है।
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और बुधवार को मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद गृह विभाग ने परिहार के लिए एक बार फिर तीन महीने का पैरोल बढ़ा दिया।

2008 से ही पैरोल का क्रम बदस्तूर जारी

reality of jawahar singh parihar parole

परिहार के पैरोल की कहानी किसी की समझ में नहीं आई। सरकार किसी भी राजनीतिक दल की हो, मुख्यमंत्री कोई भी हो लेकिन 2008 से ही पैरोल का क्रम बदस्तूर चालू है।

बागेश्वर के गांव मोटा सीमल, थाना कोतवाली बागेश्वर का निवासी परिहार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश अल्मोड़ा ने 04.01.2005 को आईपीसी की धारा 302, 307 और 379 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

विगत मई 2008 में परिहार को हरिद्वार कारागार से देहरादून जेल भेजा गया। परिहार ने देहरादून में काटी गई लगभग छह साल की सजा में से ढाई साल से ज्यादा समय पैरोल के माध्यम से जेल से बाहर गुजारा।

बुधवार को परिहार के लिए सरकार ने फिर तीन महीने का पैरोल स्वीकृत किया। परिहार को अब तक कुल 16 बार पैरोल पर छोड़ा जा चुका है।

कैसे मिलती रही पैरोल

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यूपी सरकार के 1973 के शासनादेश में यह व्यवस्था है कि किसी भी विचाराधीन या सजायाफ्ता कैदी को एक साल में तीन महीने से ज्यादा और लगातार दो बार पैरोल नहीं मिलेगा।

लेकिन 29 मई 2008 को देहरादून जेल आने वाले परिहार के पैरोल में कई बार वृद्धि की गई जिससे पैरोल की निरंतरता बनी रही।

इससे भी संवेदनशील बात यह रही कि परिहार को दो वर्ष पहले एक अन्य मामले में आठ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।

जब यह मुकदमा विचाराधीन था तब भी परिहार को पैरोल मिलता रहा। जबकि किसी अन्य मुकदमे के विचाराधीन होने पर पहले किसी अन्य मुकदमे में हुई सजा के आधार पर कैदी को पैरोल नहीं मिल सकता।

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संजय दत्त के पैरोल पर बिठाई थी जांच

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दिसंबर 2013 में जब महाराष्ट्र सरकार ने आर्म्स एक्ट में यरवदा जेल में सजा काट रहे फिल्म अभिनेता संजय दत्त को पुन: पैरोल पर छोड़ा तो इतना विरोध हुआ कि लगातार पैरोल पर छोड़ने की जांच के आदेश करने पड़े।

नतीजतन, संजय दत्त को जेल भेजना पड़ा और उसके बाद अब तक पैरोल नहीं मिला। जबकि परिहार को तो हत्या के मामले में मुजरिम करार दिया गया है।

सबको खबर, मगर सब बेखबर

प्रदेश के गृह मंत्री प्रीतम सिंह इस मामले से पूरी तरह अनजान हैं। मुख्य सचिव सुभाष कुमार का फोन बंद है।

बीपी पांडे के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद एमएच खान ने गृह विभाग का आज ही चार्ज लिया है। इसके अलावा अन्य अफसरों भी इस मामले में कुछ नहीं बोलना चाहते।

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