नोटबंदी: मुद्रा संकट से उबरने के लिए आरबीआई ने मांगे सुझाव
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बड़े नोटों के चलन से बाहर होने के बाद फजीहत झेल रही जनता को बड़े और छोटे नोटों की समस्या से जल्द राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। रुद्रपुर की जनता के दर्द को समझने आए आरबीआई के प्रतिनिधियों ने समस्या निवारण के लिए जनता की राय तो ली, लेकिन खुद इस बात का खुलासा नहीं कर पाए कि मुद्रा संकट की स्थिति कब तक सामान्य होगी।
बुधवार को आरबीआई के डिप्टी सेकेट्री विक्रमजीत सिंह ने डीएम चंद्रेश यादव और एसएसपी सेंथिल अबुदई के साथ मिलकर कलेक्ट्रेट सभागार में विभिन्न बैंकों के अधिकारियों, व्यापारियों, किसानों और जनप्रतिनिधियों की बैठक लेकर उनकी समस्याएं सुनीं और आवश्यक सुझाव मांगे।
बैठक में बैंक अधिकारियों का कहना था कि उन्हें मांग के हिसाब से कैश नहीं मिल रहा है जिस कारण वह उपभोक्ताओं को राहत नहीं दे पा रहे हैं।
कोऑपरेटिव बैंक की शाखाएं बंदी के कगार पर
केंद्र द्वारा शादी के लिए जारी किए गए ढाई लाख देने के जीओ का पालन भी कैश के अभाव में नहीं हो पा रहा है।
बीओबी के अनुसार उनके द्वारा एक सप्ताह में 260 करोड़ की राशि मांगी गई थी, लेकिन उन्हें सिर्फ 80 करोड़ ही मिल पाए जो सभी उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त नहीं थे।
इसके साथ ही सिर्फ एटीएम से 100 के नोट देने का आदेश भी बैंकों के साथ ही उपभोक्ताओं को परेशान कर रहा है। डिस्ट्रिक कोऑपरेटिव बैंक के अनुसार जिले भर में उनकी 29 ब्रांच और 25 समितियां हैं, जिनमें सवा सौ करोड़ का मासिक लेनदेन होता है लेकिन वर्तमान में उन्हें 15 से तीस लाख ही मिल पा रहा है। इस कारण उनकी अधिकांश शाखायें बंदी की कगार पर पहुंच गई हैं।
बैंकों और एटीएम पर लग रही आधी फोर्स
किसानों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि 80 प्रतिशत किसानों के खाते समितियों में हैं लेकिन समिति में नोट बदली बंद होने से उनके लिए बीज और खाद खरीदना मुश्किल हो गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि नोटबंदी के बाद जिले भर के बैंकों और एटीएम में लग रही लाइनों को व्यवस्थित करने में ही जिले की आधी फोर्स लग रही है। इससे लॉ एंड आर्डर को संभालना मुश्किल हो रहा है।
ट्रांसपोर्टरों का कहना था कि छोटे नोटों के अभाव में सवारियों से टिकट लेना मुश्किल हो रहा है। बैठक में उपस्थित लोगों के सुझाव लेने के बाद डिप्टी सेकेट्री विक्रमजीत सिंह ने सभी लीड बैंकों और समितियों से अपने सुझावों की रिपोर्ट 25 नवंबर तक केंद्र को भेजने की बात कही।