सत्ता में आते ही रावत बने 'शक्तिमान', लेकिन अटके काम
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सत्ता में आते ही सीएम हरीश रावत ने ताबड़तोड़ घोषणाएं और शिलान्यास, सुबह घोषणाएं शाम को विज्ञप्ति, एक महीने में आठ कैबिनेट बैठकें और करीब साढ़े तीन सौ नए फैसले लिए।
देर रात तक बैठकों से सचिवालय गुलजार रखने और सुबह गेस्ट हाउस में जनता दरबार लगाकर हजारों फरियादियों की गुहार सुनना कुछ ऐसा ही बीता नए मुख्यमंत्री हरीश रावत का एक माह का कार्यकाल।
मुख्यमंत्री इस दौरान दूसरों से हटके जरूर दिखे, लेकिन इस सबके बावजूद तमाम काम अभी भी अटके हुए हैं। इसकी बानगी हैं प्रदेश की दो महत्वपूर्ण सेवाएं स्वास्थ्य और शिक्षा।
मंत्रियों को नहीं सौंपे विभागों के दायित्व
मंत्रियों को विभागों का दायित्व न सौंपे जाने से कई योजनाएं अटकी हुई हैं और रूटीन के विभागीय कार्य जस के तस हैं।
यह सच है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने न सिर्फ अपने बल्कि पुराने मुख्यमंत्री के कार्यकाल की तमाम घोषित योजनाओं को गति देकर वाहवाही लूटी है।
लेकिन इनमें से गिनीचुनी ही धरातल पर उतरी हैं। विशेषज्ञों की मानें तो विज्ञप्ति जारी करने की प्रक्रिया होती है। दरअसल किसी योजना को धरातल पर लाने से पहले उसका तकनीकी परीक्षण करना अनिवार्य होता है।
उसमें निचले स्तर से अनुभाग तक कई स्तर पर टिप्पणी आदि का भी महत्व होता है। जबकि एक महीने में मुख्यमंत्री के मुंह से जो निकला उसकी विज्ञप्ति जारी हो गई। ऐसे में कई योजनाएं तकनीकी स्तर पर उलझ जाएंगी।
खुल सकता है पिटारा
मुख्यमंत्री हरीश रावत रविवार को देहरादून लौटेंगे। एक महीने में मुख्यमंत्री ने कभी बजट सत्र, तो कभी राहुल गांधी की रैली के बाद विभागों की घोषणा के संकेत दिए।
विभागों को समान प्रकृति का बनाने की बात कह कर मामले को एक महीने खींच ले गए। शनिवार शाम मुख्यमंत्री ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी से मुलाकात की।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री ने विभागों के बंटवारे का खाका उनकेसामने पेश किया। अंबिका सोनी के बुलावे पर ही मुख्यमंत्री शनिवार को दिल्ली रवाना हुए थे।
चूंकि विभाग न बांटे जाने से न सिर्फ मंत्रियों में असंतोष बढ़ रहा है बल्कि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाने के बाद संबंधित विभाग में कोई नई योजना या घोषणा नहीं की जा सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग: डॉक्टरों ने आना बंद किया
प्रदेश के कई जिलों में सरकारी अस्पतालों में संविदा पर तैनात डॉक्टरों के अनुबंध का नवीनीकरण न होने से दिक्कतें शुरू हो गई हैं। देहरादून, हरिद्वार और रुड़की में संविदा डाक्टरों के नहीं आने से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गईं।
इससे जहां मरीजों की फजीहत हुई वहीं चिकित्सकों को ड्यूटी के दौरान भागदौड़ करनी पड़ी। इस दौरान अस्पतालों में अफरातफरी का माहौल रहा।
बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग ने संविदा डॉक्टरों के अनुबंध का नवीनीकरण उनकी परफॉरमेंस के आधार पर करने का फैसला किया है। इसके चलते प्रदेश में कार्यरत करीब 250 संविदा डॉक्टरों में 10 से 15 प्रतिशत की कटौती तय है।
स्वास्थ्य महानिदेशक गौरी शंकर जोशी का कहना है कि नवीनीकरण के लिए डॉक्टरों की परफॉरमेंस रिपोर्ट के आधार पर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
अफसर कर रहे मनमाने तबादले
बिना मंत्री के शिक्षा विभाग के अफसरों की मौज है। अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर शिक्षकों के तबादले कर रहे हैं और उनकी लंबित समस्याओं पर विचार नहीं किया जा रहा है।
स्थिति यह है कि बोर्ड की परीक्षाएं सिर पर हैं लेकिन अभी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पहले परीक्षाएं 24 मार्च से शुरू होनी थी, जिसे बाद में संशोधित कर 27 मार्च कर दिया गया।
अब पंचायत चुनाव टलने के बाद परीक्षाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।