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पढ़िए, चुनावी दुनिया की अनोखी कहानियां

Wed, 07 May 2014 08:54 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 07 May 2014 08:54 AM IST
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rare story of election

सन 1984। तीस वर्ष पूर्व जब देश तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उबल रहा था, उत्तराखंड (तब अविभाजित यूपी का पर्वतीय हिस्सा) के मतदाताओं ने नई सरकार चुनने के लिए बैलेट पेपर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया।

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वर्ष 1952 में पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2009 तक के सभी चुनावों में 84 का ही चुनाव था, जिसमें उत्तराखंड के मतदाताओं ने रिकार्ड 63.56 प्रतिशत मतदान किया। इससे पहले वर्ष 1957 में 62.2 प्रतिशत वोटिंग रही थी।
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बाकी चुनावों में यह आंकड़ा 48 से 61 प्रतिशत के बीच रहा है। 16वीं लोकसभा के लिए चल रहे चुनाव के अब तक के चरणों में अलग-अलग राज्यों में लगातार मतदान के रिकार्ड टूटे हैं।
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ऐसे में उत्तराखंड में सात मई को मतदाता नई इबारत लिखते हैं या नहीं, इस पर निर्वाचन आयोग से लेकर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की भी नजर है।

शुक्र है कि हम भारत में हैं, जमकर डालो वोट

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हमारे देश के कई बुद्धिजीवी स्विटजरलैंड की प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक प्रणाली (डायरेक्ट डेमाक्रेसी) का गुणगान करते नहीं थकते। बेशक इसमें कई परिवर्तनों के लिए जनमत (रेफरेंडम) की व्यवस्था की गई है लेकिन कड़वी हकीकत यह है कि 1971 से पूर्व स्विटजरलैंड में महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता था।

उन्हें न तो वोट का अधिकार था, न ही फेडरल चुनावों में खड़े होने की इजाजत थी। 1971 में भी महिलाओं को वोट का अधिकार देने के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराया गया था।

जानकर अचरज होगा कि 323,596 लोगों ने इसके खिलाफ वोट दिए थे, हालांकि यह प्रस्ताव इसके मुकाबले 621,403 मतों से पारित हो गया था। स्विटजरलैंड में 1848 से अपना संविधान लागू है। भारत बेशक 1947 में आजाद हुआ और 1950 में इसका संविधान लागू हुआ लेकिन यहां के सभी नागरिकों को शुरू से मताधिकार दिया गया।

उम्र 91, पहली लोकसभा से नॉन स्टाप वोटिंग

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नेता जी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के लड़ाके साधु सिंह बिष्ट की उम्र 91 साल है। इन बूढ़ी हड्डियों में आज भी जोश और जज्बा बरकरार है।

साधु सिंह पहले लोकसभा चुनाव (1952) से लगातार वोटिंग करते आ रहे हैं। इस बार वह 16वीं बार लोकसभा के लिए मतदान करेंगे। ऐसा करने वाले साधु सिंह डोईवाला क्षेत्र के संभवत: इकलौते वोटर हैं।

उन्होंने पहली लोकसभा के लिए पंजाब के अमृतसर में वोट डाला था। चुनाव की बात छिड़ते ही ग्रामसभा कान्हरवाला के बारूवाला निवासी साधु सिंह कहते हैं कि मातृभूमि के लिए मर मिटने की सोच रखने वाला ही देश को तरक्की की ओर ले जा सकता है।

पहले मतदान और फिर मंगल स्नान

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परिणय सूत्र में बंधने वाली दुल्हन और दूल्हे में 16वीं लोकसभा चुनाव के लिए होने वाले मतदान को लेकर जबरदस्त उत्साह है। मंगल स्नान से पहले दुल्हन और दुल्हा अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। उसके बाद शादी के बंधन में बधेंगे।

बारहवीं पास नैलचामी पट्टी के चामी गांव निवासी कृष्णा बुधवार को परिणय सूत्र में बंधने जा रही है। तीन साल पहले कृष्णा के सिर से मां-बाप का साया उठ चुका है। हिंदाव पट्टी के सिलोस गांव से रघुवीर बुधवार सांय को कृष्णा के घर बारात लेकर पहुंचेगा।

कृष्णा ने मंगल स्नान से पहले मतदान करने का निर्णय लिया है। इस बारे में उसने अपने भाई बबलू को बता दिया है। भाई बबलू ने बहिन के जज्बे की सराहना की। कृष्णा के घर से चामी मतदान केंद्र आधा किमी दूर है।

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