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20 सितंबर 1995 में उत्तरांखड में हुआ था ऐसा बस हादसा, जिसने छीन ली थी 70 जिंदगियां

Sun, 01 Jul 2018 06:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Sun, 01 Jul 2018 06:24 PM IST
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rare of the rarest bus accident in uttarakhand
बस दुर्घटना - फोटो : AmarUjala file photo

20 सितंबर 1995 को गंगोत्री हाईवे पर डबराणी के पास हुई बस दुर्घटना जिले के इतिहास की सबसे भीषण दुर्घटना थी, जिसमें 70 लोग काल के गाल में समाए थे। 

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जिले में घुमावदार संकरी सड़कों पर वाहन चालक की हल्की सी लापरवाही जानलेवा साबित होती है। इसके अलावा राज्य गठन के बाद से अब तक जिले में 240 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। इसमें 100 लोगों की मौत तो बीते डेढ़ साल के भीतर ही हुई है।
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हर बार हादसा होने पर दुर्घटना के कारणों की पड़ताल के लिए मजिस्ट्रेटी जांच करायी जाती है, लेकिन इसमें दिए गए सुझावों के अनुसार धरातल पर कार्रवाई नहीं होने का ही परिणाम है कि सड़क हादसों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जिले में हुए कुछ हादसे तो सड़कों की बदहाली के कारण हुए, लेकिन अधिकांश दुर्घटनाओं का कारण तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और वाहन चालक की लापरवाही ही रही है। 

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उत्तरकाशी जनपद में हुए बड़े सड़क हादसे

rare of the rarest bus accident in uttarakhand
bus accident - फोटो : amar ujala
1- 20 सितंबर 1995 को डबराणी के पास बस गंगा भागीरथी में गिरने से 70 लोगों की मौत
2- 9 जुलाई 2006 को नालूपाणी में बस गिरने से 22 लोगों की मौत
3- 3 जुलाई 2008 को नाकुरी के पास बस गिरने से 13 लोगों की मौत 
4- 21 जुलाई 2008 को सुक्की टॉप के पास बस गिरने से 14 लोगों की मौत
5- 4 जुलाई 2009 को भटवाड़ी गंगनानी के बीच बस गंगा भागीरथी में गिरने से 40 लोगों की मौत 
6- 10 दिसंबर 2009 को नालूपाणी में टैक्सी वाहन गंगा भागीरथी में गिरने से 12 लोगों की मौत 
7- 1 अगस्त 2010 को डबराणी के पास ट्रक खड्ड में गिरने से 27 कांवड़ यात्रियों की मौत 
8- 23 मई 2017 को गंगोत्री हाईवे पर नालूपाणी के पास बस गिरने से 26 लोगों की मौत 
9- 4 जून 2017 को गंगोत्री हाईवे पर हेलगूगाड के निकट टैक्सी गंगा भागीरथी में गिरने से 12 लोगों की मौत 
 

जिले की सड़कों पर दर्जनों डेंजर एवं दुर्घटना संभावित जोन 

rare of the rarest bus accident in uttarakhand
accident - फोटो : amar ujala file photo

सड़क हादसों पर रोक के लिए पुलिस एवं परिवहन विभाग समय-समय पर चेकिंग अभियान तो चलाते हैं, लेकिन हादसों का कारण बनने वाली सड़कों को दुरुस्त कराने व डेंजर जोन वाले हिस्सों को जोखिम रहित बनाने की दिशा में अभी ठोस कवायद की जरूरत है। जिले के आपदा प्रबंधन विभाग ने ही यात्रा मार्ग के साथ ही जिले की विभिन्न सड़कों पर 64 डेंजर जोन चिह्नित किए हैं।

इनके अलावा परिवहन विभाग ने भी यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे पर सुगम एवं सुरक्षित यातायात के लिए कुल 90 स्थल चिह्नित कर यहां आवश्यक सुधार के सुझाव दिए हैं। डीएम डा. आशीष चौहान द्वारा खराब सड़क हादसा होने की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी के बाद भी अधिकारी बदहाल सड़कों की सुध लेने को राजी नहीं। वर्तमान में देखें तो यमुनोत्री हाईवे पर ओजरी डबरकोट वाले हिस्से में पहाड़ी से बरसते बोल्डरों के बीच वाहनों की आवाजाही चल रही है।

निरंतर चलाया जा रहा है चेकिंग अभियान 
बीते कुछ सालों में जिले की सड़कों पर वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि को भी हादसों का कारण माना जा रहा है। साथ ही यहां बाहरी राज्यों से कंडम हो चुकी बसें खरीदकर उनकी मरम्मत के बाद जिले की सड़कों पर दौड़ाने की सूचना भी है। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी चक्रपाणि मिश्र ने बताया कि जिले में 13 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 42 बसें और 32 स्कूल बसें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि समय-समय पर वाहनों की फिटनेस टेस्ट कर प्रमाणपत्र जारी किए जाते हैं। जिले में यातायात नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा तेज रफ्तार एवं ओवरलोडिंग पर रोक के लिए निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। 

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