कुरान की तिलावत करते हुए रोजेदार बुजुर्ग महिला का इंतकाल, लोग मान रहे खुशनसीबी की मौत
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मुकद्दस रमजान में कुरान की तिलावत करते हुए रोजेदार बुजुर्ग महिला का इंतकाल हो गया। इसे शरई तौर पर खुशनसीबी की मौत माना जाता है। पास पड़ोसियों को खबर मिली तो खिराज ए अकीदत करने वालों का तांता लग गया। तरावीह के बाद महिला को सुपुर्द ए खाक किया गया।
मोहल्ला बांसफोड़ान निवासी हाफिज मुस्तफा मुरादाबाद रोड स्थित फल मंडी में आढ़ती है। बेटे भी उनका हाथ बंटाते हैं। बताते हैं कि मुस्तफा के परिवार में दीनी माहौल है। उनके परिवार में सभी सदस्य रोजे रखते हैं। मुस्तफा की पत्नी शकूरन (62) मंगलवार को जौहर की नमाज के बाद कुरान पढ़ रही थीं।
अचानक वह निढाल हो गईं। उनका माथा रेहल पर रखे कुरान पर टिक गया। बहुओं ने उन्हें इस हालत में देखा तो उठाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनका इंतकाल हो चुका था। देर रात तरावीह के बाद बौंगे शाह के कब्रिस्तान में शकूरन को सुपुर्द ए खाक किया गया। उनके पति हाफिज मुस्तफा ने जनाजे की नमाज पढ़ाई।
शहर इमाम मुफ्ती मुनाजिर हुसैन का कहना है कि एक न एक दिन सभी को मरना है, लेकिन ऐसी मौत खुशनसीबों को मिलती है। रमजान के मुकद्दस महीने में रोजे की हालत में कुरान की तिलावत करते हुए रूह परवाज होना खुदा की खास रहमत की निशानी है। ऐसे ही लोगों के लिए दुनिया और आखिरत (परलोक) की कामियाबी की खुशखबरी है।