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'स्टांप चोरी' में रामदेव को हाईकोर्ट से राहत
अमर उजाला, नैनीताल
Updated Sun, 05 Jan 2014 10:12 AM IST
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हाईकोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड की भूमि पर स्टांप ड्यूटी संबधी मामले में राजस्व परिषद के आदेश को निरस्त करते हुए कलक्ट्रेट हरिद्वार को आदेशित किया है कि वह मामले में नए सिरे से विचार करते हुए दोनों पक्षों को सुनकर विधि अनुसार आदेश पारित करें।
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एकलपीठ के समक्ष हुई सुनवाई
न्यायमूर्ति बीएस वर्मा की एकलपीठ के समक्ष शनिवार को मामले की सुनवाई हुई। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार की ओर से वर्ष 2008 में पतंजलि आयुर्वेद की औषधियां उगाने और अनुसंधान करने के लिए जनपद एवं तहसील हरिद्वार में ग्राम मुस्तफाबाद में कुल 56.468 हेक्टेअर भूमि क्रय करने की अनुमति दी थी।
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उसके बाद पतंजलि आयुर्वेद की ओर से भूमि क्रय करते समय उस समय निर्धारित सर्किल रेट के आधार पर स्टांप ड्यूटी का भुगतान कर दिया गया था। इसके बाद भूमि की रजिस्ट्री करा ली गई थी।
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क्या था मामला?
याचिका में कहा गया कि मार्च 2009 में सरकार की ओर से पंतजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड को प्राइवेट औद्योगिक संस्थान बनाने की अनुमति प्रदान करने के बाद सब रजिस्ट्रार ने भविष्य में इस्तेमाल होने वाले औद्योगिक भूमि के लिए बढ़ी हुई दरों पर स्टांप ड्यूटी जमा करने के लिए कलक्ट्रेट हरिद्वार के यहां स्टांप एक्ट में धारा 47ए के तहत वाद दायर किया।
इस मामले में गलत रूप से संज्ञान लेने हुए कलक्ट्रेट हरिद्वार ने नौ लाख रुपये से अधिक मूल्य की स्टांप ड्यूटी और पौने चार लाख का जुर्माना पतंजलि आयुर्वेदिक लिमिटेड पर आरोपित किया।
पहले भी स्टांप ड्यूटी हुई थी निरस्त
पंतजलि आयुर्वेद ने सरकार की ओर से 6 जून, 2009 को जारी नोटिफिकेशन के आधार पर कलक्ट्रेट के यहां एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया। जिसके अनुसार किसी भी भूमि को भविष्य में इस्तेमाल के लिए स्टांप ड्यूटी आरोपित नहीं की जा सकती है।
इस पर कलक्ट्रेट हरिद्वार ने उक्त शासनादेश का संज्ञान लेते हुए पूर्व पारित आदेश को निरस्त करते हुए पतंजलि आयुर्वेद पर आरोपित स्टांप ड्यूटी और जुर्माने के आदेश को निरस्त कर दिया था।
पतंजलि का पक्ष नहीं सुना
इस आदेश को राजस्व परिषद में चुनौती दी गई। राजस्व परिषद ने बिना पतंजलि आयुर्वेद का पक्ष सुने ही कलक्ट्रेट द्वारा जारी आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राजस्व परिषद के आदेश को निरस्त करते हुए कलक्ट्रेट हरिद्वार को आदेशित किया है कि वह मामले में नए सिरे से विचार करते हुए दोनों पक्षों को सुनकर विधि के अनुसार आदेश पारित करें।