शुभ संयोगः इस रामनवमी जो मांगोगे वो मिलेगा
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वही वार, वही नक्षत्र, वही लग्न और वही योग, हूबहू सब वैसा ही जैसा भगवान श्रीराम के जन्म के समय था।
ऐसा संयोग अंतिम बार 27 साल पहले यानी वर्ष 1987 में बना था। यही वजह है कि इस बार रामनवमी को और अधिक शुभ और पुण्यकारी माना जा रहा है।
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उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी का कहना है कि नवमी तिथि के साथ ही इस बार मंगलवार, कर्क लग्न, पुष्य नक्षत्र और सुकर्मा योग बन रहा है।
निश्चित रूप से श्रद्धालुओं को मिलेगा फल
भगवान राम का जन्म भी मंगलवार को ही माना जाता है। सुकर्मा योग का अर्थ ही सुकर्म से है। यह योग कभी-कभी ही बनता है।
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डॉ. आचार्य सुशांत राज का कहना है कि ऐसी शुभ घड़ी में यदि भगवान का षोडषोपचार पूजन, आरती और पुष्पांजलि विधिवत किया जाए तो इसका फल निश्चित रूप से श्रद्धालुओं को मिलता है।
1947 से मिलती है 2014 की कुंडली
अध्यात्मवेत्ता और गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि वर्तमान संवत्सर देश के लिए विशेष शुभ है। इस वर्ष समूह साधना का विशेष लाभ साधकों को मिलेगा।
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राष्ट्र के खोए गौरव को भी वापस लाने का अवसर इस बार मिलेगा। गुरुवार को हरिद्वार स्थित शांतिकुंज के मुख्य सभागार में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि वर्ष 1947 में जैसा पंचांग आया था, वैसा ही इस बार भी आया है।
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समूचे ग्रह नक्षत्र वर्ष 1947 की भांति हैं। यह संवत् निश्चय देश के लिए शुभ होगा। इस वर्ष सामूहिक साधना की अर्जित शक्ति से राष्ट्र के खोए गौरव को वापस लाने में मदद मिलेगी।
डॉ. पंड्या ने कहा कि नवरात्र के दिन शक्ति उपार्जन के दिन हैं। यह समय अनुष्ठान के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। साधना से शक्ति का उपार्जन हो सकता है। मनोयोग पूर्वक यज्ञानुष्ठान किए जाए तो पूरे विश्व की उन्नति तय है।
आज पूजें स्कंदमाता स्वरूप
नवरात्र के चौथे दिन गुरुवार को मां के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की गई। देहरादून के विभिन्न देवी मंदिरों में सुबह और शाम के अलावा दोपहर में भी श्रद्घालु दर्शन के लिए जुटते रहे।
मांगलिक कार्यों के साथ ही विशेष पूजा-अर्चना के दौर चलते रहे। टपकेश्वर स्थित माता वैष्णों देवी गुफा मंदिर में भजन और आरती के दौरान लोगों की श्रद्घा देखते ही बनी।
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‘मां की हर बात निराली है...’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु जमकर झूमे। हाथीबड़कला स्थित काली मंदिर में मां की फूलों से आरती की गई। पटेलनगर स्थित श्री आदर्श मंदिर में 5 अप्रैल को बाला जी की ज्योति यात्रा मेहंदीपुर राजस्थान से लाई जाएगी।
श्री पृथ्वीनाथ मंदिर की ओर से श्रद्धालु ज्योति लेने मेहंदीपुर रवाना हुए। साथ ही मंदिर में दुर्गा-सप्तशती का पाठ हुआ। इसके अलावा कालिका मंदिर, पंचायती मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।