नाईक बोले, तिरुवल्लुवर राष्ट्रीय एकता के प्रतीक, शंकराचार्य विरोध में
- मेघालय के राज्यपाल ने संत तिरुवल्लुवर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला
- श्रीलंका के राज्यमंत्री ने प्रख्यात कवि को मानवता के प्रति समर्पित बताया
- कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुदर्शन ने भी उनके साहित्य पर प्रकाश डाला
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि तमिल के प्रख्यात संत और कवि तिरुवल्लुवर राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे। उनकी ओर से रचित साहित्य जनकल्याण, राष्ट्रीय एकता और समरसता को समर्पित है। नाईक ने हरिद्वार में उनकी प्रतिमा स्थापित करने के प्रयास को राष्ट्रीय एकता की दिशा में मील का पत्थर बताया।
डामकोठी परिसर में बुधवार को राज्यसभा सांसद तरुण विजय की ओर से आयोजित संत एवं कवि तिरुवल्लुवर की प्रतिमा अलंकरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि संत और महापुरुष विश्व के आदर्श होते हैं।
प्रख्यात कवि तिरुवल्लुवर ने जिस तरह से अपने साहित्य के जरिये दुनिया को जनकल्याण का रास्ता दिखाया वह अनुकरणीय है। उनकी प्रतिमा स्थापित करने के प्रयास के लिए उन्होंने सांसद तरुण विजय को साधुवाद दिया।
नहीं पहुंचे उत्तराखंड सीएम और राज्यपाल, ऐन वक्त पर बदला कार्यक्रम
मेघालय के राज्यपाल षणमुगमनाथन ने भी तिरुवल्लुवर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। कहा कि उनकी प्रतिमा स्थापित करने से यहां आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को उनके बारे में जानने का अवसर मिलेगा। श्रीलंका से पहुंचे तमिल मूल के राज्यमंत्री सेंथिल तोड़ाईमान ने तिरुवल्लुवर को मानवता के प्रति समर्पित बताया। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सुदर्शन नाचियापन और वरिष्ठ पत्रकार पदमानाथन ने भी तिरुवल्लुवर के साहित्य पर प्रकाश डाला।
सांसद तरुण विजय ने कहा कि 2054 वर्ष पहले तिरुवल्लुवर की मान्यता संत कबीर, तुलसी और मीराबाई की तरह ही है। उन्होंने प्रतिमा की स्थापना के प्रयासों में मिले सहयोग के लिए उत्तराखंड और यूपी सरकार के अलावा कई नेताओं और अधिकारियों का आभार जताया।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे प्रतिनिधियों का पुष्प व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर जल्द ही प्रतिमा को उचित स्थान पर स्थापित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. केके पॉल और मुख्यमंत्री हरीश रावत को भी शामिल होना था लेकिन ऐन वक्त पर उनका कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया।
सनातन से जिसका वास्ता नहीं उसकी प्रतिमा क्यों: शंकराचार्य
द्वारिका एवं ज्योर्ति मठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने आद्य शंकराचार्य की प्रतिमा के सामने तमिल कवि तिरुवल्लुवर की मूर्ति लगाने का विरोध किया।
बुधवार को कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति का हरिद्वार या उत्तराखंड से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा उसकी प्रतिमा लगाने का हरिद्वार में क्या औचित्य है। सनातन नगरी में ऐसे व्यक्ति की प्रतिमा किसी हाल में नहीं लगने देंगे। उन्होंने अन्य प्रदेशों के राज्यपालों के पहुंचने पर भी सवाल उठाए।
कार्यक्रम में यह रहे उपस्थित
कार्यक्रम में दक्षिण के संत शांता महरानंद, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव आर रविशंकर, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, पूर्व मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन, हरिद्वार के एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस, एसएसपी राजीव स्वरूप आदि अधिकारी और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से तमिल मूल के लोग उपस्थित रहे।