देखें, ठाठ-बाट वाले रामदेव के भाई का जेल में कैसा है हाल
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ठाठ-बाट से जिंदगी जीने वाले बाबा रामदेव के छोटे भाई रामभरत ने खुद को जेल की दुनिया में ढाल लिया है। अभी तक उन्होंने किसी भी तरह की परेशानी को लेकर जेल प्रशासन से शिकायत नहीं की। इसके अलावा वह किसी से बातचीत भी नहीं कर रहे हैं।
27 जून को पतंजलि हर्बल फूड पार्क में हुई हिंसक झड़प के मुख्य आरोपी रामभरत को करीब एक माह जेल में हो चुका है। एसी में रहने वाले रामभरत ने अभी तक जेल प्रशासन से न गर्मी या बैरक में मच्छर होने की शिकायत की और न खाने पीने को लेकर आ रही दिक्कत बताई। वह पूरी तरह शांत है।
जेल की बैरक तीन ए में कैद रामभरत की दिनचर्या सुबह छह बजे बैरक खुलने से शुरू हो जाती है। बैरक के अंदर दो शौचालय हैं। जबकि एक शौचालय बाहर है। रामभरत को मिलाकर बैरक में सौ कैदी हैं।
हर किसी को नंबर से चीज इस्तेमाल के लिए मिलती है। इस कांड में जेल में कैद अन्य सभी आरोपी दूसरी बैरकों में रखे गए हैं। रामभरत का अधिकतर समय मुलाकात में बीत रहा है। जेल अधीक्षक एसके सुखीजा ने बताया कि जेल में हर कोई एक समान है।
जमानत पर आज सुनवाई
पतंजलि हर्बल फूड पार्क के मुख्य आरोपी रामभरत की जमानत याचिका पर मंगलवार को नैनीताल उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। हर किसी की निगाह जमानत याचिका पर लगी हुई है।
सोमवार को पुलिस महकमे में रामभरत की जमानत की सुनवाई को लेकर चर्चा होती रही। विशेषकर पुलिस के उच्चाधिकारी भी टकटकी लगाए बैठे हैं। हालांकि, कानून के जानकार एक माह में संगीन आरोपों में घिरे रामभरत को राहत मिलने की उम्मीद कम ही बता रहे हैं।
हाईकोर्ट ने मांगा विडियो फुटेज
नैनीताल हाईकोर्ट ने पतंजलि हर्बल फूड पार्क में हुई मारपीट के मामले में बाबा रामदेव के भाई राम भरत की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को मंगलवार को विडियो फुटेज दिखाने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सोमवार को सुनवाई हुई। मामले के अनुसार रामभरत ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दायर कर कहा कि बीती 27 मई को धर्मेंद्र सिंह चौहान ने थाना पथरी जिला हरिद्वार में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें उनके (रामभरत), पतंजलि हर्बल फूड पार्क के मैनेजर योगेश कुमार, अनिल गोस्वामी, सुरक्षा गार्ड तथा 30-40 व्यक्तियों ने एकजुट होकर सड़क पर उनके साथ मारपीट तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया।
एफआईआर के मुताबिक याचिकाकर्ता द्वारा तोड़फोड़ कर ट्रकों को क्षति पहुंचाई। इस घटना में घायल दलजीत सिंह की उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से निचली अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
याचिकाकर्ता ने निचली अदालत के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार को विडियो फुटेज दिखाने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई मंगलवार को होगी।