रक्षाबंधन 2020 : मायूस हुए लोग जब नहीं पहुंची राखी की डाक, कोरोना संकट के चलते आई समस्या
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रक्षाबंधन पर कहीं भाई अपनी बहन का प्यार पाकर बेहद खुश थे तो कहीं मायूस भी नजर आए। ऐसे कई लोग थे जिन्हें रक्षाबंधन पर बहन की ओर से भेजी गई राखी नहीं मिली।
जनरल विंग (प्रेमनगर) निवासी गगन ग्रोवर ने कहा कि उनकी बहन दिल्ली, कनॉट प्लेस में रहती हैं। लेकिन, इस बार कोरोना संक्रमण के चलते वह देहरादून नहीं आ पाईं।
उन्होंने 20 जुलाई को डाक से राखी भेजी थी, लेकिन अभी तक डाक नहीं मिली। डाकघर में भी पता किया। लेकिन डाक नहीं मिली। नाथुवावाला (रायपुर) निवासी अरुण ने भी कहा कि उनकी बहन ने 15 दिन पहले राखी भेजी थी, लेकिन अभी तक राखी नहीं मिली। राखी न पहुंचने पर थोड़े से मायूस हैं। इनके अलावा भी कई लोगों ने राखी न पहुंचने की शिकायत की।
सात समंदर पार आई बहन की याद
ऋषि विहार मेहूंवाला निवासी अनूप नौटियाल दुबई में पांच सितारा होटल में कार्यरत हैं। हर बार उनकी बहनें देहरादून से स्पीड पोस्ट से उन्हें राखी भेजती हैं। लेकिन, इस बार कोरोना संकट के चलते हवाई सेवा प्रभावित होने पर राखी नहीं भेज पाईं। सभी बहनों ने फोन पर छोटे भाई अनूप को रक्षाबंधन की बधाई दी और तरक्की की कामना की।
उत्तराखंड सीमा में प्रवेश करने वाली डाक की डिलीवरी कर दी है। शनिवार व रविवार को अवकाश के दिन भी सभी पोस्टमैनों ने पूरी ऊर्जा के साथ रात तक राखी की डाक बांटी। जिन राज्यों में संक्रमण ज्यादा है वहां से डाक डिलीवर करने में थोड़ी दिक्कत आई है।
-अनसूया प्रसाद चमोला, प्रवर डाक अधीक्षक (देहरादून मंडल)
बहनों का इंतजार करते रह गए रोडवेज चालक-परिचालक
हर बार की तरह परिवहन निगम ने इस रक्षाबंधन पर भी बहनों के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था की थी। इसके लिए अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की थी। लेकिन, चालक-परिचालक बहनों का इंतजार करते रह गए। कोरोना संकट के चलते पूरे प्रदेश में सोमवार को मात्र 1500 महिलाओं ने सरकारी बसों में यात्रा की। जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 42000 था।
परिवहन निगम ने सोमवार को रक्षाबंधन के लिए 500 बसों के साथ चालकों-परिचालकों की ड्यूटी लगाई थी। लेकिन, बहनों ने कोरोना संक्रमण के चलते यात्रा से दूरी बनाई। जिसकी वजह से निगम ने मात्र 225 बसें संचालित की। महाप्रबंधक दीपक जैन का कहना है कि कोरोना संकट के चलते इस बार रक्षाबंधन पर बेहद कम महिलाओं ने सरकारी बसों में सफर किया।
इसके अलावा रोडवेज के सहायक महाप्रबंधक और आईएसबीटी डिपो के प्रभारी आरएल पैन्यूली ने बताया कि आईएसबीटी देहरादून से रक्षाबंधन के दिन 62 बसों का संचालन किया। जिसमें मात्र 612 यात्रियों ने सफर किया।
रक्षाबंधन के दिन महिलाओं को आने-जाने में किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए पर्याप्त बसों की व्यवस्था की थी। लेकिन, बेहद कम महिलाओं ने सफर किया। औसत के हिसाब से देखें तो रक्षाबंधन के दिन आईएसबीटी से रवाना होने वाली बसों में एक बस में मात्र 10 यात्रियों ने सफर किया।