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कांग्रेस को मिला एक और मजबूत हाथ का साथ

Mon, 14 Apr 2014 12:23 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 14 Apr 2014 12:23 PM IST
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rajni rawat with congress

लोक सभा चुनाव की बहार आते ही निष्ठा बदलने का दौर भी शुरू हो चुका है। इसमें कई हैवीवेट अपनी एंट्री दर्ज करा चुके हैं।

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रजनी रावत भी कांग्रेस में शामिल
महाराज भाजपा और टीपीएस कांग्रेस का दामन थाम ही चुके हैं। अब बारी क्षत्रपों की हैं। रजनी रावत को कांग्रेस में शामिल कर इसकी शुरूआत की जा चुकी है।

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हालांकि बाहर से ऐन चुनाव में पार्टी में आने वाले लोगों को लेकर कांग्रेस का पुराना अनुभव सही नही रहा है। एक बार तो कांग्रेस एक नहीं बल्कि सौ लोगों को इस मामले को लेकर नोटिस भी थमा चुकी है।

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विजय बहुगुणा ने बनाया था बहन

rajni rawat with congress

चुनाव गरमाने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अब बूथ प्रबंधन की कोशिश शुरू कर दी है। ऐसे में थोड़े बहुत वोटों पर पकड़ रखने वाले नेताओं की गणेश परिक्रमा भी शुरू हो चुकी है।

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कांग्रेस में अब शामिल हुई रजनी रावत को तो पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बाकायदा कांग्रेस में शामिल करते हुए धर्म बहन बनाया था।

बाद में रजनी बहुगुणा से इतनी खफा हुई कि लोक सभा उपचुनाव में बसपा के टिकट पर कांग्रेस के खिलाफ ही मैदान में उतरी।

इसी तरह 2012 के उपचुनाव में पूर्व मंत्री मातबर सिंह कंडारी भाजपा छोड़ कांग्रेस का थाम चुके थे। अब मातबर भाजपा में आने को आतुर हैं और इसे अपनी घर वापसी बता रहे हैं।

अब दलों की नजर क्षत्रपों पर

rajni rawat with congress

इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के खिलाफ एक बार चुनाव लड़ चुके टीपीएस धूमाकोट की सीट खंडूड़ी के लिए खाली करने वालों में थे।

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हर बार की तरह चुनाव के ठीक पहले हैवीवेट का कोटा खत्म होने के बाद अब दलों की नजर क्षत्रपों पर है। अब असंतुष्ट पार्टी वर्करों से लेकर पदाधिकारियों तक की खोज हो रही है।

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कांग्रेस का पुराना अनुभव बेहद खराब

rajni rawat with congress
स्थानीय स्तर पर कुछ एक समर्थकों को साथ रखने वाले किसी भी नेता का राजनीतिक दल स्वागत कर रहे हैं। हालांकि दल या निष्ठा बदलने वाले इन नेताओं को लेकर कांग्रेस का पुराना अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा है।

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पार्टी में जोर दार तरीके से एंट्री करने वाले नेताओं के असंतोष का सामना भी कांग्रेस पहले से करती आई है। एक बार तो कांग्रेस अनुशासन समिति ने बाकायदा सौ लोगों को नोटिस ही थमा दिया था।

हाल यह था कि चुनाव के दौरान पार्टी में शामिल नेताओं को बाहर निकालने की तैयारी तक कांग्रेस ने की थी।
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