वहशियाना कत्ल से पहले राजेश का था जुनूनी इश्क, पढ़ें उसके लिखे LOVE LETTER
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पत्नी अनुपमा की हत्या के बाद 72 टुकड़े करने और साक्ष्य मिटाने के मामले में आजीवन कारावास पाने वाले राजेश गुलाटी ने अनुपमा से बेइंतहा इश्क किया था। इसके गवाह हैं वो प्रेम पत्र जो उसने समय-समय पर उसने अनुपमा को लिखे थे।
प्रेम पत्रों से उसकी दीवानगी दिखती ही है, साथ में उसका संघर्षशील और दार्शनिक पक्ष भी दिखता है। पत्रों से जाहिर होता है कि अनुपमा गुलाटी के प्रति वह बहुत ज्यादा पजेसिव था। अनुपमा किसी और के साथ बात करे या ज्यादा देर तक खुद उससे बात न करे, यह बात उसे कतई नागवार गुजरती थी।
हैरतअंगेज तरीके से सभी खत अंग्रेजी के कैपिटल लेटर में लिखे गए हैं। बीच-बीच में कभी-कभार हिंदी के शब्दों का प्रयोग किया गया है। पता लगता है कि साफ्टवेयर इंजीनियर को अंग्रेजी में खतो-किताबत ज्यादा भाती थी। कुछ पत्रों पर तारीख लिखी है, कुछ में नहीं।
पत्र 1
तारीख कोई नहीं, संबोधन कोई नहीं
पढ़ने के दौरान ही मुझे तुमसे इश्क हो गया था। मैंने अपना पूरा टाइम टेबल बना लिया है। मेरा एग्जाम होने वाला है इसलिए फिलहाल पत्र नहीं लिख पाऊंगा। लव यू
राजेश गुलाटी
एमसीए फ र्स्ट ईयर मेंस हास्टल
बी ब्लाक वेल्लोर इंजीनियरिंग कालेज, तमिलनाडु
पिन कोड 632007
इंपार्टेंट :- प्लीज हिंदी में लेटर लिखना, क्योंकि यहां कोई हिंदी नहीं समझता। अगर लेटर गलती से कोई देख भी लेगा तो नहीं समझेगा।
पत्र 2. हाय डार्लिंग
तिथि 21 नवंबर 1994
करीब 32 महीने बाद तुमसे मुलाकात हुई। मैं उन दिनों को बहुत मिस करता हूं जब हम हफ्ते में एक दिन जरूरी दिल्ली के वसंत विहार में मिला करते थे। लोधी गार्डन में दिन गुजरता था। कभी प्यार-मोहब्बत से तो कभी बिना किसी बात के झगड़ते हुए। हालांकि यह सब सोचकर कई बार मेरी पढ़ाई में एकाग्रता भी भंग होती है। तुम्हारे साथ गुजारे दिन बेहद अच्छे थे। ऐसा महसूस करता हूं कि तमिलनाडु में तो सिर्फ मेरा शरीर है, आत्मा तो तुम्हारे पास दिल्ली में छूट गई है। तुम सोच रही होंगी कि मैं यहां मौज में हूं, लेकिन यहां आकर देखो तुम्हारे नोनू का क्या हाल हो गया है।
मैं सोचता हूं कि एक दिन मैं तुम्हें हिन्दी में खत लिखूं पर मैं हिंदी में बहुत सुस्त हूं, तुम और प्रियतमा कैसी हो जैसे संबोधन पर हंसोगी। जब तुम गुस्सा होती हो तो और भी खूबसूरत लगती हो, मैं ठीक कहता हूं ना।
पत्र 3
संबोधन हाय डार्लिंग
तिथि 24 जनवरी 1994
तुम कैसी हो, मैं हास्टल में ठीक हूं, पढ़ाई भी ठीक हो रही है। कुछ दिनों में दिल्ली आ जाऊंगा। और हां तुम्हारा एग्जाम भी तो है, मैं सुबह तुम्हें एग्जाम सेंटर छोड़ दूंगा। दोपहर में फिर साथ रहेंगे। सुनो क्या तुमने मेरी मां से बात की। वह शर्तिया कहेंगी कि मुझे मम्मी बोलो। मैं ठीक हूं ना डार्लिंग, मैं कुछ ही दिनों में वापस आ रहा हूं।