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नई पहलः रेन वॉटर हार्वेस्टिंग नहीं तो नहीं मिलेगा बिजली-पानी

Thu, 28 Jul 2016 08:59 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 28 Jul 2016 08:59 AM IST
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rainwater harvesting initial for institution
बिजली - फोटो : amar ujala

उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में बेहद तेजी से गिरते जलस्तर ने शासन के आला अधिकारियों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं।

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इसे देखते हुए वर्षा जल संचयन यानी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के तंत्र की स्थापना पर सख्ती की जाएगी। बीते दिनों हुई सचिव समिति की बैठक में यह तय किया गया है कि प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन तंत्र स्थापित न करने वाले प्रमुख प्रतिष्ठानों को बिजली और पानी के कनेक्शन से महरूम कर दिया जाएगा। इस बाबत प्रस्ताव को जल्द ही मुख्यमंत्री से स्वीकृत कराया जाएगा।

भूगर्भ जल के बेतरतीब दोहन के चलते राज्य के ज्यादातर मैदानी क्षेत्रों में जल स्तर काफी नीचे जा चुका है, जो बेहद चिंता का विषय है। इस संबंध में पूर्व में शासन की ओर से कई बार रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तंत्र की स्थापना के लिए काफी प्रयास किए जा चुके हैं। बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान भी चलाए गए, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं पड़ा।
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वहीं एमडीडीए जिसे रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को नियमानुसार स्थापित करवाने के लिए जिम्मेदार बनाया गया है, उसके स्तर से कभी कोई गंभीरता नजर ही नहीं आई। यह स्थिति देखते हुए अब इस मुद्दे पर सख्ती की जाएगी।

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यहां लगाना अनिवार्य होगा रेन वॉटर हार्वेस्टिंग

rainwater harvesting initial for institution

मंगलवार को हुई सचिव समिति की बैठक में यह मुद्दा जोरशोर से उठा। बैठक में यह तय हुआ है कि रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को मैदानी इलाकों में स्थित सरकारी और गैरसरकारी यूनिवर्सिटी, स्कूल-कॉलेज, ग्रुप हाउसिंग, अस्पतालों के साथ-साथ वाणिज्यिक कांप्लेक्स और मॉल में लगाना अनिवार्य होगा।

इसके लिए सभी को चिन्हित करके नोटिस दिए जाएंगे। नोटिस की अवधि से छह से नौ माह के भीतर तंत्र की स्थापना अनिवार्य होगी। ऐसा न होने की दशा में उनके बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा। सरकारी प्रतिष्ठानों में संबंधित विभागाध्यक्ष और अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई भी होगी।

पहले चरण में इसे मैदानी क्षेत्रों के लिए अनिवार्य किया जाएगा। उसके बाद जहां भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिरता पाया जाएगा, उन क्षेत्रों में भी यह व्यवस्था अमल में लाई जाएगी। बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री के सामने प्रस्ताव प्रस्तुत करके आदेश जारी किया जाएगा।

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