फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   rainwater harvesting

बारिश की बूंद-बूंद बचाकर यहां सूखे के बीच खिलाई हरियाली

Fri, 26 Aug 2016 01:47 PM IST
विनय बहुगुणा/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
विनय बहुगुणा/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Fri, 26 Aug 2016 01:47 PM IST
विज्ञापन
rainwater harvesting
39 टंकियों में जमा हो रहा पानी

बरसाती पानी के संरक्षण में पर्वतीय कृषि महाविद्यालय चिरबिटिया अनूठा कार्य कर रहा है। कालेज ने इस बरसात में ही अभी तक 1.70 लाख लीटर पानी का संचय किया है। जिले का यह एकमात्र ऐसा संस्थान है, जो वर्षा जल संरक्षण (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) का कार्य कर रहा है।

विज्ञापन


मार्च-अप्रैल में बारिश नहीं होने से जिले में 70 फीसदी फसलें सूखे से नष्ट हो गई थी। इस वजह से जनपद को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया, लेकिन जिले में जखोली ब्लाक के चिरबटिया स्थित पर्वतीय कृषि महाविद्यालय की आठ हेक्टेयर भूमि पर रोपे गए फलदार पौधे और फूल हरे-भरे रहे। कारण, पिछले तीन वर्ष से यहां वर्षा जल संरक्षण के क्षेत्र में सबसे बेहतरीन कार्य किया जा रहा है।
विज्ञापन


महाविद्यालय के कैंपस के सभी भवनों की छत से लेकर हेलीपैड तक गिरने वाली बारिश की एक बूंद को भी जाया नहीं होने दिया जाता। बारिश का जो भी पानी यहां गिरता है, वह प्लास्टिक पाइपों की मदद से चारों तरफ लगाई गई प्लास्टिक टंकियों में पहुंच जाता है। इस सीजन में अभी तक एक लाख 70 हजार लीटर पानी अभी तक जमा किया जा चुका है। यह पानी दो तरफा लाभ पहुंचा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


एक तरफ महाविद्यालय की आठ हेक्टेयर भूमि पर उगाए जा रहे विभिन्न प्रजातियों के फूल, फल और अन्य पेड़-पौधों की नियमित सिंचाई हो रही है, वहीं एक किमी दूर बन रहे नए कैंपस के निर्माण के लिए इस पानी को मोटर की मदद से पहुंचाया जा रहा है। महाविद्यालय तीन वर्षों में करीब पांच लाख लीटर पानी का संचय कर चुका है, इसमें करीब दो लाख लीटर खर्च हो चुका है।

39 टंकियों में जमा हो रहा पानी

rainwater harvesting

पर्वतीय कृषि महाविद्यालय के कैंपस भवनों के चारों तरफ लगी इन टंकियों में एक हजार लीटर की छह, पांच सौ लीटर की 28 और दो हजार लीटर की दो टंकियां हैं। चार सीमेंट के टैंक भी बने हैं, जिनमें दो टैंक क्रमश: 20 और 45 हजार लीटर और दो टैंक 60-60 हजार लीटर क्षमता के हैं। इतनी ही क्षमता के दो और टैंक जल्द बनाए जाएंगे। 

वर्षा जल का संरक्षण के क्षेत्र में पर्वतीय कृषि महाविद्यालय चिरबटिया बेहतरीन कार्य कर रहा है। सात हजार फीट की ऊंचाई पर यह कार्य और भी विशेष हो जाता है। तीन माह पूर्व मैंने स्वयं वहां का निरीक्षण किया। यहां कृषि के क्षेत्र में अपार स्वर्णिम संभावनाएं हैं। प्रशासनिक स्तर से जो भी संभव होगा सहयोग किया जाएगा।
- डा. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग

बारिश के पानी को संरक्षित कर उसका कृषि के क्षेत्र में बेहतर से बेहतर उपयोग हो सकता है। इसी उद्देश्य से कालेज शुरू होते ही वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रयास शुरू किए गए। अभी तक परिणाम सुखद रहे हैं। आने वाले समय में इसे और वृहद रूप देने की योजना तैयार की जा रही है।
- डा. वीपी नौटियाल, डीन, पर्वतीय कृषि महाविद्यालय चिरबटिया, रुद्रप्रयाग

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed