केदारनाथ यात्राः केदारघाटी में फिर डरा रहा मौसम
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सोमवार को सुबह 9:30 बजे तक सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम की ओर 240 तीर्थयात्री रवाना हुए। केदारनाथ से दो यात्रियों को सेहत बिगडऩे पर वापस भेजा गया।
रविवार को केदारनाथ की यात्रा शुरू होते ही मौसम ने रोक दी। केदारनाथ धाम के कपाट रविवार सुबह 6.15 पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए।
लेकिन दोपहर में मौसम खराब होने के कारण केदारनाथ जा रहे यात्रियों को पुलिस प्रशासन ने सोनप्रयाग में रोक दिया। बताया गया कि मौसम ठीक होने पर सोमवार को यात्रा जारी रहेगी।
रविवार को केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद करीब एक हजार श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। लेकिन धाम में करीब 11 बजे के बाद मौसम खराब हो गया।
लगभग 11.30 बजे ओले भी गिरे। दोपहर बाद सोनप्रयाग और गौरीकुंड में बारिश शुरू हो गई। इसे देखते हुए दोपहर सवा दो बजे सोनप्रयाग में पुलिस प्रशासन ने यात्रियों को रोकना शुरू कर दिया। कहा गया कि आगे मौसम खराब है।
गरज के साथ बरसात होने का अलर्ट जारी
देर शाम आपदा प्रबंधन विभाग ने रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी आदि स्थानों के लिए गरज के साथ बरसात होने का अलर्ट भी जारी किया।
दिन सवा दो बजे तक करीब 150 लोग केदारनाथ से वापस आ चुके थे और करीब 100 लोग केदारनाथ के लिए रवाना हो गए थे। जो लोग रवाना हुए अब उनका ठिकाना लिनचोली होगा।
उधर, बदरीनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में भी सुबह से छाए बादल दोपहर बाद बरस पड़े। इससे धाम में ठंड बढ़ गई है।
बारिश के चलते लामबगड़ से कंचन गंगा तक हाईवे का बड़ा हिस्सा कीचड़ में तब्दील हो गया। जगह-जगह पानी भरने से वाहनों को आवाजाही में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मलबे के दलदल में वाहनों के फंसने से हाईवे पर बार-बार जाम लग रहा है।
मौसम की मेहरबानी पर ही निर्भर करेगी यात्रा
यह तय है कि इस बार की यात्रा भी मौसम की मेहरबानी पर ही निर्भर करेगी। यात्रा के नाम पर माइलेज लेने की कोशिश में सरकार ने यात्रा को अब मौसम के हवाले छोड़ दिया है।
मतलब यह कि ऐसी कोई भी कोशिश नहीं की गई कि यात्रा को बरसात में भी जारी रखा जा सकता। ठीक सवा दो बजे पुलिस इस बात का ऐलान कर चुकी है कि मौसम खराब होने के कारण आगे की यात्रा स्थगित कर दी गई है।
यात्रियों को अपने ठहरने और रहने खाने की व्यवस्था करने को कह दिया गया। देर शाम आपदा प्रबंधन विभाग ने भी अलर्ट जारी कर दिया।
मौसम की मेहरबानी पर यात्रा की निर्भरता का एक कारण सड़क भी है। यात्रा मार्ग की सड़कों को सिर्फ ब्लैक टॉप किया गया है। सड़कें पहले की तरह ही नदियों के फ्लड जोन में हैं।
जून 2013 के दौरान आई आपदा में बरबाद सड़कों का अलाइमेंट बदलने की बजाय इन सड़कों को पहले के स्थान पर ही कटिंग कर बना दिया गया है। जाहिर है कि बरसात में ये सड़कें जवाब दे जाएंगी।
पैदल मार्ग पर लगातार काम जारी
सोनप्रयाग से केदारनाथ के बीच पैदल मार्ग पर लगातार काम जारी है। मौसम खराब होने पर यह काम भी रुकेगा और कच्चा रास्ता और खराब हो सकता है।
यही हाल बदरीनाथ धाम की सड़कों का भी हैं। यहां लामबगड़ से आगे सड़क पूरी तरह से बरसात की दया पर निर्भर है। एक तेज बरसात लामबगड़ से बिनाकोली तक की सड़क की हालत खराब करने के लिए काफी है।
दोनों ही धामों में खास बात यह रही कि सड़क का काम तक फरवरी अंत में शुरू किया गया। आपदा के बाद के सात-आठ महीनों को यूं ही गुजार देने पर क्षेत्र के लोगों में गुस्सा भी है और इनकी सरकार के प्रति नाराजगी भी।
दूसरी ओर मौसम को लेकर इस बार प्रशासन ही नहीं बल्कि यात्री भी सजग हैं। हाल यह है कि केदारनाथ से लेकर सोनप्रयाग तक अगर केदार की जय के नारे हैं तो साथ में मौसम पर भी टिप्पणी।
चुनाव नहीं, यात्रा की बात कीजिए
केदारघाटी में चुनाव नहीं सिर्फ यात्रा की बात हो रही है। हालांकि मतदान के लिए कुछ ही दिन बाकी हैं। पर अगर कोई बात हो रही है तो वह है यात्रा।
मंदिर समिति अध्यक्ष और श्रीनगर विधायक गणेश गोदियाल भी चुनाव की चिंता छोड़ शनिवार से ही केदार धाम में डटे हुए थे। रविवार को गणेश गोदियाल पैदल ही वापस लौटे।
केदारघाटी का व्यापारी वर्ग इस बात से नाराज है कि बजाय स्थानीय लोगों को दुकाने देने के जीएमवीन से दुकानदारी कराई जा रही है।
जीएमवीएन ने जंगलचट्टी और छोटी लिंचोली में खाने की व्यवस्था की है पर जंगलचट्टी में जीएनवीन यात्रियों को पैसों में सामान भी उपलब्ध करवा रहा है।
प्रशासन ने 16 मई तक खुद ही व्यवस्था करने और इसके बाद ही स्थानीय दुकानदारों को दुकाने अलॉट करने की बात की है। हाल यह है कि सोनप्रयाग से लेकर केदारधाम तक एक भी दुकान नही है।