उत्तराखंड में बारिश का कहर: बदरीनाथ हाईवे बंद, कोटद्वार में तबाही जारी
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उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को देहरादून में भी बादल छाए रहे। जहां एक बार फिर बदरीनाथ हाईवे पहाड़ी से लगातार गिर रहे मलबे के कारण बंद हो गया है तो वहीं कोटद्वार में बारिश से कई घर ध्वस्त हो गए हैं। वहीं सोमवार को भी रुद्रप्रयाग में बारिश जारी रही। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे बंद पड़ा हुआ है। केदारनाथ यात्रा सुचारु है।
चमोली जिले में पिछले तील दिनों से लगातार बारिश हो रही है। जिले में 25 ग्रामीण संपर्क मार्ग और दो राष्ट्रीय राजमार्ग बंद पड़े हैं। बदरीनाथ हाईवे चमोली बाजार से दो किलोमीटर आगे क्षेत्रपाल में बंद पड़ा है। लोग यहां पर पुलिस के मना करने के बाद भी जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। हाईवे पर लामबगड़ में सोमवार को चौथे दिन भी वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं हो पाई है। हाईवे बंद होने पर लामबगड़ से 153 तीर्थयात्री पैदल चलकर बदरीनाथ धाम पहुंचे, जबकि 77 तीर्थयात्री बदरीनाथ के दर्शन कर गंतव्य को लौटे।
क्षेत्रपाल में पहाड़ी से लगातार भूस्खलन हो रहा है। हिल साइड पर करीब 200 मीटर तक मलबा और पत्थर अटके हुए हैं। जो रह रहकर सड़क पर छिटक रहे हैं। बदरीनाथ और हेमकुंड की यात्रा पर जाने वाले यात्री अपने रिस्क पर 2 किमी पैदल चलकर खेनुरी गांव से होते हुए भीमतला बाजार पहुंच रहे हैं। फिर वहां से स्थानीय वाहनों से 50 किमी दूरी तय कर लामबगड़ पहुच रहे हैं।
यहां भी हाईवे चट्टान से मलबा और बोल्डर गिरने से तीन दिनों से बंद है। लिहाजा यहां भी यात्री तीन किमी तक पैदल पगडंडी नापकर लामबगड़ बाजार पहुंच रहे हैं। जिसके बाद स्थानीय वाहनों से बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। हेमकुंड के यात्री क्षेत्रपाल में पैदल चलने के बाद वाहनों से 45 किमी. दूर स्थित गोविंदघाट बाजार पहुच रहे हैं। यहां से फिर तीन किमी तक स्थानीय वाहन से भ्यूंडार गांव पहुंच रहे हैं। और फिर 16 किमी की पैदल यात्रा कर हेमकुंड धाम पहुंच रहे हैं।
कोटद्वार में कई ग्रामीणों के घर क्षतिग्रस्त
तहसील कोटद्वार के जमरगड्डी ग्राम पंचायत के जमरगड्डी मल्ली में अतिवृष्टि से सात ग्रामीणों के आवासीय भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को हुई क्षति का जायजा लेने राजस्व उप निरीक्षक संगीता राज मौके पर पहुंच गई है। जमरगड्डी मल्ली में राजकुमारी देवी पत्नी स्व कृपाल सिंह, विमला देवी पत्नी स्व कुंवर सिंह के आवासीय भवनों में अतिवृष्टि से मलबा भर गया। जमरगड्डी तल्ली के समोद्रा देवी, सोहन सिंह, यशपाल सिंह, दिनेश सिंह, विनोद सिंह के आवासीय भवनों में भूधंसाव से दरार पड़ गई है। प्रभावित ग्रामीणों ने उनके पुनर्वास की मांग उठाई है।
थराली बाजार का अस्तित्व खतरे में आ गया है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नीचे भूस्खलन होने से पेड़ और मलबा बाजार में गिर गया है। सीएचसी थराली का भवन पूरी तरह खतरे की जद में हैं। यदी भवन की विशाल बिल्डिंग गिर गई तो मुख्य बाजार जमींदोज हो सकता है। वहीं राड़ीबागड़ से थराली बाजार तक कई जगह पुस्ते टूटने और मलबा आने से आवागमन बंद है। यहां स्कूलों में अवकाश रखा गया है।
बारिश थमने के बाद बढ़ सकता है डेंगू का प्रकोप
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बारिश के बाद डेंगू का प्रकोप बढ़ सकता है। हालांकि डेंगू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी सुभाष जोशी के मुताबिक दो तीन के अंतराल पर हो रही तेज बारिश के कारण पिछले साल की तुलना में इस बार डेंगू का प्रभाव न के बराबर है। बारिश के चलते नदी, नाले, नालियों में पनप रहे डेंगू व मलेरिया के लार्वा पानी में बह जा रहे हैं। इससे लार्वा के पनपने का अवसर नहीं मिल रहा है। बारिश के थमने के बाद डेंगू व मलेरिया के लार्वा को पनपने का अनुकूल मौसम मिलेगा, लेकिन इस अवस्था से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम की ओर से एहतियाती कदम अभी उठाए जा रहे हैं। डेंगू संभावित इलाकों में फागिंग कराने के साथ ही एंटी लार्वा स्प्रे कराया जा रहा है।
जागरूकता के लिए आशा कार्यकर्त्रियों को दी जिम्मेदारी
डेंगू फैलने न पाए इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा कार्यकर्त्रियों को सचेत कर दिया गया है। इसके तहत आशा कार्यकर्त्रियां घर घर जाकर लोगों को डेंगू से बचाव की जानकारी दे रही हैं। इसके अलावा जलजमाव और डेंगू का लार्वा पनपने के संभावना वाले इलाकों को चिह्नित कर रही हैं।