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उत्तराखंड में बारिश से राहत, आग की घटनाएं हुई कम

Thu, 31 May 2018 08:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 31 May 2018 08:54 AM IST
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rain give relief form uttarakhand wildfire
जंगल में लगी आग

बारिश होने से प्रदेश में वनों की आग की घटनाओं में काफी कमी आई है। राज्य में 24 घंटे में केवल 19 जगहों पर आग लगने की घटनाएं हुई हैं, जिसमें 34 हेक्टेयर जंगल जला है। इससे पहले रोजाना 496 हेक्टेयर तक जल रहा था।

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मुख्य वन संरक्षक बीपी गुप्ता के अनुसार 29 मई को कई जिलों में बारिश से आग लगने की घटनाओं में कमी आई है। 24 घंटे में केवल 19 घटनाओं में करीब 34 हेक्टेयर जंगल जला है। यह बीते दिनों की तुलना में काफी कम है। अभी तक प्रदेश में 1965 घटनाओं में 4224 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा नुकसान गढ़वाल रीजन को हुआ है। 2470 हेक्टेयर से ज्यादा का जंगल केवल गढ़वाल रीजन में जंगल की आग की भेंट चढ़ गया। जबकि कुमाऊं में 1248, शिवालिक रीजन में 351 और वन्यजीव क्षेत्र में करीब 154 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है।  
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राज्य मानवाधिकार आयोग ने वन महकमे से तलब की रिपोर्ट
प्रदेश में आग लगने की घटनाओं से चिंतित राज्य मानवाधिकार आयोग ने वन विभाग से रिपोर्ट तलब की है। वन महकमे को गुरुवार को रिपोर्ट देने को कहा है। राज्य में आग लगने की घटनाओं में वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश में 1965 घटनाओं में 4224 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंच चुका है, जिसमें 81 लाख से अधिक की वन संपदा राख हो चुकी है। इसके अलावा कई लोग आग की चपेट में आने में घायल हो चुके हैं। इन घटनाओं को देखते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने वन विभाग से मामले पर रिपोर्ट मांगी है। इसमें आग लगने की घटनाएं, उनकी रोकथाम के लिए किए गए प्रयास, उपकरणों की स्थिति, आग बुझाने में लगे कर्मियों की संख्या आदि को बताने को कहा गया है। बुधवार को अधिकारी आयोग को प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट बनाने में लगेे रहे। मुख्य वन संरक्षक बीपी गुप्ता के अनुसार आयोग के सम्मुख गुरुवार को प्रस्तुत होकर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
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जंगल की आग पर काबू पाना अब होता जा रहा है मुश्किल 
जलवायु परिवर्तन और अन्य कारणों से जंगल में नमी का कम होते जाना और निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण प्रदेश में वनाग्नि की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। खुद वन विभाग अब स्वीकार कर रहा है कि आग की घटनाएं फरवरी माह से पहले से ही सामने आ रही हैं। वन विभाग फारेस्ट फायर सीजन फरवरी से मानता है। कुमाऊं में ही जंगलों में लगी आग में अभी तक 430.42 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं।


वन विभाग का दावा है कि कुमाऊं में जंगलों की आग पर काबू करने के लिए  करीब 7,000 फायर फाइटर तैनात किये गए हैं। वन विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए फायर लाइन भी बनाई है। रियल टाइम निगरानी की व्यवस्था भी की है। इसके बावजूद जंगल की आग पर काबू पाना हर साल मुश्किल होता जा रहा है। खुद विभाग इन तमाम दावों के बाद भी बजट की कमी का सामना कर रहा है।  आग बुझाने के लिए वन विभाग ने सरकार से 60 करोड़ मांगे थे लेकिन सिर्फ 12 करोड़ मिले हैं।

तीन सालों में वनाग्नि की घटनाएं
साल                   वनाग्नि की घटनाएं        जला जंगल        पौधे प्रभावित
2016                   731                      1744.12 हे       5,293
2017                  428                       811.14 हे        1,450
2018 (अभी तक)     203                       430.42 हे         2,000

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