देहरादून में बारिश, चकराता-बदरी-केदार में बर्फबारी
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पिछले एक हफ्ते से गर्मियों की आहट देने के बाद रविवार को राजधानी देहरादून सहित उत्तराखंड के कई इलाकों में ठंड लौट आई। रविवार को तड़के दून में हुई बारिश ने मौसम में ठिठुरन बढ़ा दी।
देहरादून सहित रुद्रप्रयाग में भी रविवार की सुबह हल्की बारिश होने से लोग घरों में दुबके रहे। केदारनाथ में बर्फबारी होने से निचले इलाके शीत लहर के प्रकोप में आ गए हैं। बदरीनाथ और औली के ऊंचाई वाले इलाकों में भी हिमपात होने की खबर है। केदारनाथ में रविवार को सुबह छह बजे से बर्फबारी हो रही है।
सुबह केदारधाम में माइनस 3.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। उधर, देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र में भी बर्फबारी हुई, जिससे पर्यटकों के चेहरे खुशी से खिल गए। रविवार को चकराता के जौनसार बावर की ऊंची चोटियों पर मौसम का पहला हिमपात हुआ। जिससे लोखंडी के पास त्यूनी-चकराता मोटर मार्ग बंद हो गया।
उधर, वीकेंड पर बारिश होने से देहरादून के लोगों और पर्यटकों ने मसूरी की ओर रुख किया। वहीं हरिद्वार में सुबह से ही घने बादलों के साथ बूंदाबांदी होती रही।
केदारनाथ में मौसम था शुष्क
पिछले एक सप्ताह से केदारनाथ में मौसम शुष्क बना है। लेकिन रविवार को बर्फबारी होने से यहां पहाड़ियों पर सफेद चादर बिछ गई। पिछले एक हफ्ते से केदारघाटी में दिनभर चटक धूप खिल रही थी।
भले ही सुबह-शाम हल्के बादल छा रहे थी। मंदिर के पीछे पहाडिय़ों सहित भैरवनाथ मंदिर की पहाडिय़ों से बर्फ पूरी तरह से पिघल चुकी थी। निम के देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि पिछले चार दिनों में दोपहर के तापमान में प्रतिदिन वृद्धि दर्ज की जा रही थी।
जनवरी से फरवरी तक केवल 5.4 मिमी बारिश
उधर, उत्तराखंड में मौसम की बेरुखी का असर दिखने लगा है। एक ओर तापमान में बढ़ोतरी की वजह से गर्मियों की आहट हो रही है, तो दूसरी ओर बारिश नहीं होने से फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है।
मौसम विभाग भी चिंतित हैं कि अगर यही हाल रहा तो आने वाले दिन दुखदायी हो सकते हैं। मौसम विभाग के मुताबिक एक जनवरी से तीन फरवरी के बीच प्रदेश में बारिश में भारी कमी दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में एक जनवरी 2016 से तीन फरवरी 2016 के बीच महज 5.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। यह बीते वर्षों की तुलना में इस महीने में बारिश में 91 प्रतिशत की गिरावट है।
बीते पांच वर्षों में इस महीने में यह सबसे बड़ी गिरावट बताई जा रही है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि बागबानी और फसलें ठीक रहें इसके लिए जरूरी है कि फरवरी महीने में अच्छी बारिश हो।
पांच साल में इस साल गर्मी वाली ठंड
पांच सालों में इस साल सबसे अधिक गर्मी वाली ठंड रही है। इसका अंदाजा पिछले पांच साल के अधिकतम तापमान को देखकर लगा सकते हैं। मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि मौसम जनवरी 2011 की अपेक्षा 2012 में अधिक गरम रहा।
इसी तरह मौसम में हर साल गर्मी बढ़ती ही गई है। यदि इन वर्षों की केवल 31 जनवरी के तापमान को ही देखें तो साल 2011 से इस दिन अधिकतम तापमान बढ़ा ही है। लेकिन इस साल 31 जनवरी को अधिकतम तापमान 25.9 डिग्री दर्ज किया गया जबकि 31 जनवरी 2011 को अधिकतम तापमान 20 डिग्री दर्ज किया गया था।
जाहिर है कि साल छह डिग्री अधिक तापमान रहा। यही वजह रही कि इस साल जनवरी में गर्मी वाली ठंड महसूस की गई।
धनपुर क्षेत्र के जंगलों में आग
रुद्रप्रयाग में शनिवार को भी धनपुर रेंज के पावौ सहित अन्य निकटवर्ती गांवों के जंगल में आग सुलगती रही। इधर, जिला मुख्यालय सहित पूरे क्षेत्र में दिनभर धुंध छाई रही। धुंध से सूरज की तपन अधिक महसूस की गई।
पिछले तीन माह से बारिश नहीं होने से मौसम का मिजाज खतरनाक बनता जा रहा है। दिसंबर-जनवरी में जहां मद्महेश्वर और केदारघाटी के कई गांवों के जंगल वनाग्नि से राख हो चुके हैं, वहीं दो दिन से अगस्त्यमुनि ब्लाक के धनपुर पट्टी के पावौ सहित अन्य गांवों के जंगलों में आग लगी हुई है।
वन विभाग की मानें तो केदारनाथ वन प्रभाग और रुद्रप्रयाग वन प्रभाग में बीते दो माह में 15 हेक्टेयर वन क्षेत्र वनाग्नि की चपेट में आने से राख हो चुका है।