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दिल्ली की तर्ज पर दून में दौड़ेगी ‘रेडियो कार’

Sun, 27 Apr 2014 04:22 PM IST
मनमीत रावत / अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 27 Apr 2014 04:22 PM IST
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radio car in dehradun

दिल्ली की तर्ज पर अब दून में भी ‘रेडियो कार’ चलाई जाएंगी। वातानुकूलित और लग्जरी गाड़ियों से लैस यह सुविधा लोगों को 24 घंटे मिलेगी।

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शुरुआती चरण में करीब 20 परमिट
आरटीओ के भेजे प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी दे दी है। शुरुआती चरण में करीब 20 परमिट जारी किए जाएंगे। योजना सफल रहने पर परमिट संख्या बढ़ा दी जाएगी।

अभी तक दून आने वाले यात्रियों (रेलवे या बस) के लिए स्टेशन से घर तक जाने के लिए ऑटो ही एकमात्र जरिया था। बेहतर सुविधा के लिए किराए की टैक्सी करनी पड़ती थी। यह आम तौर महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रहता था।

युवतियों के लिए सुरक्षित ट्रांसपोर्ट
दिल्ली गैंग रेप के बाद आरटीओ ने रात की ट्रेन और बसों से दून पहुंचने वाली युवतियों के लिए सुरक्षित ट्रांसपोर्ट सेवा शुरू करने पर विचार कर रहा था।

दिल्ली, लखनऊ और मुंबई की रेडियो कार पर पूरी तरह होमवर्क करने के बाद आखिरकार दिल्ली की रेडियो कार स्कीम को फाइनल किया गया। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को प्रेजेटेंशन देने के बाद परमिट फीस तय कर दी जाएगी।
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इमरजेंसी में पेनिक बटन करेगा अलर्ट

रेडियो टैक्सी संचालक को ‘कम्यूनिकेशन स्किल’ और हास्पिटेलिटी (अतिथि सत्कार) का क्रेश कोर्स भी कराया जाएगा। क्योंकि अधिकांश विदेशी पर्यटक रेडियो टैक्सी की ही डिमांड करते हैं।
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इसे केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट ‘निर्भया फंड’ से भी जोड़ा जाएगा। सभी वाहन आरटीओ विभाग के कंट्रोल रूम के सर्विलांस में होंगे। इसमें ‘पेनिक बटन’ भी होगा।

यात्री को कोई दिक्कत होगी, वह पेनिक बटन दबा देगा। इससे कंट्रोल रूम में सायरन बज उठेगा और वाहन की लोकेशन जांच संबंधित थाना पुलिस को सूचना दे दी जाएगी।

इस तरह होगा फायदा

अगर आप दिल्ली से रात दस बजे दून के लिए चल रहे हैं तो दिल्ली से ही फोन पर आप रेडियो टैक्सी को सुबह चार बजे आईएसबीटी पर खड़े रहने के लिए बोल सकते हैं। दिल्ली में भी ऐसा ही होता है।

वहां यात्री पहले ही टैक्सी को सूचित कर देता है। टैक्सी चालक बताए समय से कुछ पहले ही एयर पोर्ट, रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी में खड़ा हो जाता है। यह सुविधा लखनऊ, चंडीगढ़, हैदराबाद, मुंबई आदि शहरों में भी सफलता से चल रही है।


कुछ ही दिनों में परमिट फीस तय कर ली जाएगी। रेडियो टैक्सी संचालक ऑटो वालों की तरह मनमर्जी किराया नहीं वसूल सकेंगे। रेडियो टैक्सी आरटीओ के सर्विलांस पर होगी। कोई टैक्सी संचालक तय रेट से ज्यादा वसूलता है या रसीद नहीं देता है तो कंट्रोल रूम नंबर पर शिकायत की जा सकती है। कंट्रोल रूम से ही टैक्सी की लोकेशन देख उसे तुरंत सीज कर दिया जाएगा।
- संदीप सैनी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी

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