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लालबत्ती वालों ने अंबिका सोनी को दिखाई लाल झंडी

Wed, 27 Nov 2013 09:12 AM IST
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून
अनूप वाजपेयी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 27 Nov 2013 09:12 AM IST
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race of uttarakhand congress president chair

लालबत्ती और मंत्री पद त्याग संगठन की जिम्मेदारी संभालने वाली उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अंबिका सोनी से यहां के नेता सीखने को तैयार नहीं हैं।

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कभी उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी की दौड़ में शामिल दो मंत्री प्रीतम सिंह और सुरेन्द्र सिंह नेगी ने अध्यक्ष बनने से इंकार कर दिया है। यशपाल आर्य का इस्तीफा अभी न स्वीकार होने का एक कारण यह भी है।
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अगला अध्यक्ष कौन?

आलाकमान एक बार फिर नए तरीके से सभी विकल्प, क्षेत्रीय व जातीय समीकरण को पूरा करने वाले नेता की तलाश में है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस में अब सबसे अहम सवाल है अगला अध्यक्ष कौन।
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2007 में जो नेता अध्यक्ष की दौड़ में थे उनमें से प्रीतम सिंह और सुरेन्द्र सिंह नेगी सरकार में मंत्री बन गए। कांग्रेस आलाकमान ने दोनों ही नेताओं को टटोलकर देख लिया।

लाल बत्ती के चलते दोनों ने लाल झंडी दिखा दी। एक पद एक सिद्घांत चलते सरकार में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कोई नेता संगठन में जाने से बच रहा है।

गढ़वाल, कुमाऊं और तराई में बंटी उत्तराखंड की राजनीति से कांग्रेस भी अछूती नहीं है। मुख्यमंत्री गढ़वाल से ब्राह्मण हैं इसलिए क्षत्रिय लॉबी और कुमाऊं-तराई के दावेदार अपना दावा मजबूत मान रहे हैं।

अध्यक्ष पद की हसरत पाले हैं सतपाल महाराज
हालांकि कुछ नेता इस तर्क को खारिज कर पार्टी की मजबूती के लिए मजबूत नेता की बात कर रहे हैं। सांसद सतपाल महाराज लंबे समय से अध्यक्ष पद की हसरत पाले हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें लोकसभा का चुनाव छोड़ना होगा।


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साथ ही पार्टी को जिताने के लिए धार्मिक आयोजनों से अधिक राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय होना होगा। उनके विरोधी इसी को आधार बनाते आए हैं। नैतीताल से सांसद रहे महेन्द्र पाल भी कुमाऊं से हैं और गैर ब्राह्मण हैं।

पार्टी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं लिहाजा उनका दावा भी मजबूत है। पार्टी में दूसरे प्रदेश उपाध्यक्ष और यशपाल आर्य के निकट कहे जाने वाले सूर्य कांत धस्माना भी दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बैठाने में धस्माना की भी अहम मिका रही है।

संगठनात्मक क्षमता को लेकर सवाल
पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण का नाम भी उनके समर्थक चला रहे हैं लेकिन 2007 और 2012 में हार के चलते विरोधी उनका दावा कमजोर बता रहे हैं।

हीरा सिंह बिष्ट का नाम भी दावेदारों की सूची में है लेकिन देहरादून नगर कांग्रेस अध्यक्ष रहते पार्टी में दो फाड़ हुए। हाल केदोनों चुनाव भी हारे हैं। उनके विरोधी संगठनात्मक क्षमता को लेकर सवाल खड़े करते हैं।

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