नो सिग्नल एरिया में भी हो होगा संपर्क, इस तकनीक का उपयोग करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड
- उत्तराखंड में होगा क्विक डिप्लोएलब एंटिना तकनीक का उपयोग
- सीएम रावत ने सीमांत और दुर्गम क्षेत्र मलारी, गुंजी और त्यूणी में लोगों से की बात
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उत्तराखंड के दूरस्थ व सीमांत गांवों के नो सिग्नल क्षेत्रों से अब संचार माध्यम से संपर्क हो सकेगा। यह क्विक डिप्लोएलब एंटिना तकनीक से मुमकिन होगा। एसडीआरएफ ने यह तकनीक ईजाद की है। इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बृहस्पतिवार को इस तकनीक का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने क्यूडीए तकनीक के माध्यम से राज्य के सीमांत क्षेत्र मलारी, गुंजी और त्यूणी के लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि राज्य के लिए दैवीय आपदा की स्थिति में यह तकनीक संजीवनी का कार्य करेगी।
सचिवालय स्थित एसडीएमए कंट्रोल रूम से मुख्यमंत्री ने चमोली जिले के मलारी, पिथौरागढ़ जिले के गुंजी और देहरादून जिले के त्यूणी क्षेत्र के प्रधान और ग्रामवासियों से बात की। मलारी से मंगल सिंह राणा, शेर सिंह राणा, बच्चन सिह राणा, गुंजी से कुमारी लक्ष्मी, मानवती देवी, संतोष सिंह और त्यूणी से मातवर सिंह चौहान, गोविंद शर्मा ,अंजली गुसाईं, ममता जुड़े। उन्होंने उनसे क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने एसडीआरएफ के कार्यों की सराहना की। कहा कि इसके दूरगामी परिणाम अत्यंत सुखद ओर लाभकारी होंगे। सभी ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।
बताया गया कि प्रदेश के सुदूरवर्ती व सीमांत क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य के सभी जिलों में संचार की दृष्टि से कमजोर क्षेत्रों में 248 सेटेलाइट फोन वितरित किए गए थे। इस काम को गति और व्यापकता देते हुए एसडीआरएफ ने नवीनतम टेक्नोलॉजी क्यूडीए की खरीद की। उत्तराखंड देश में प्रथम राज्य है जो इस प्रकार की टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहा है। वर्तमान में देश में एनडीआरएफ और पैरामिलेट्री फोर्सेस ही इसका उपयोग कर रहे हैं। इस अवसर पर सचिव गृह नितेश झा, सचिव आपदा एसए मुरुगेशन, महानिरीक्षक एसडीआरएफ संजय गुंज्याल, एसडीआरएफ सेनानायक तृप्ति भट्ट, सहायक सेनानायक कमल सिंह पंवार, अनिल शर्मा, अधिशासी निदेशक यूएसडीएमए, पीयूष रौतेला उपस्थित रहे।
ये होता है क्यूडीए
क्यूडीए एक प्रकार से नो सिग्नल एरिया से संचार स्थापित करने की प्रभावी और नवीनतम टेक्नोलॉजी है। इस प्रणाली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डेटा को भेजने के लिए 1.2 मीटर क्यूडीए (वीएसएटी) एंटीना टर्मिनलों और 1.2 मीटर स्टेटिक (वी.एस.ए.टी बहुत छोटे एपेरचर टर्मिनल) एंटीना टर्मिनल का उपयोग होता है।
यह विभिन्न वीसैट टर्मिनल के साथ उपग्रह आधारित संचार स्थापित करने में मदद करता है। वॉयस और वीडियो संचार को दूरस्थ से दूरस्थ वीएसएटी टर्मिनलों तक भेजा जाता है। 1.2 मीटर क्यूडीए वीएसएटी एक पोर्टेबल सिस्टम है। जो अलग-अलग दूरस्थ क्षेत्रों में तुरंत और किसी भी इलाके में स्थापित हो सकता है। यह तकनीक तत्काल सेटेलाइट से संपर्क स्थापित कर लाइव ऑडियो ओर वीडियो कॉल की सुविधा देती है।
इस तकनीक की मदद से आपदा के समय जिंदगी बचाने में मदद मिलेगी। क्यूडीए ’स्टैटिक और मोबाइल’ दो प्रकार का होता है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए किसी भी आपदा के दौरान स्टेटिक क्यूडीए का मुख्यालय जौलीग्रांट, एसडीएमए, देहरादून या किसी अन्य उपयुक्त स्थान में स्थापित होगा। मोबाइल क्यूडीए को तत्काल हेलीकॉप्टर की सहायता से संबंधित क्षेत्रों में भेजकर स्थापित किया जाएगा। जहां से आपदा के दौरान क्षेत्र की स्थिति एवं नुकसान की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सकेगी। साथ ही बचाव के लिए सशक्त योजना के अनेक विकल्प प्राप्त हो सकेंगे। इस प्रणाली के उपयोग से प्रदेश में किसी भी आपदा के दौरान मानव क्षति को कम किया जा सकेगा।