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लोक निर्माण विभाग के दो वरिष्ठ इंजीनियर निलंबित, टेंडर में लापरवाही बरतने के हैं दोषी

Tue, 14 Jan 2020 09:40 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 14 Jan 2020 09:40 PM IST
सार

  • मना करने के बावजूद जांच के दौरान जारी रखा मार्ग बनाने का कार्य
  • निलंबित इंजीनियरों में उत्तरकाशी के एसई और एक्सईएन हैं शामिल

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PWD Two Senior engineer suspended in uttarakhand
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड शासन ने लोक निर्माण विभाग के दो वरिष्ठ इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबित इंजीनियरों में एक सुपरिटेंडेंट इंजीनियर (एसई) जेपी गुप्ता, तो दूसरे एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (एक्सईएन) वीरेंद्र सिंह पुंडीर हैं।

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दोनों उत्तरकाशी जिले के डुंडा देवीधार से खटूलखाली मोटर मार्ग निर्माण की टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता बरतने के दोषी पाए गए हैं। इन पर मोटर मार्ग को लेकर चल रही जांच में सहयोग न करने का भी आरोप है।
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दोनों वरिष्ठ इंजीनियर वर्तमान में उत्तरकाशी में तैनात हैं। पुंडीर रिटायरमेंट के ऐन दो महीने पहले अनुशासनिक कार्रवाई के लपेटे में आए हैं। उनका 31 मार्च 2020 को रिटायरमेंट है।
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अपर मुख्य सचिव (लोनिवि) ओम प्रकाश के निर्देश पर अनुसचिव प्रदीप मोहन नौटियाल ने मंगलवार को दोनों वरिष्ठ इंजीनियरों के निलंबन आदेश जारी कर दिए। शासन ने माना कि उक्त मामले में दोनों इंजीनियरों के कार्य से वित्तीय हानि के साथ ही सरकार, शासन व विभाग की छवि खराब हुई है।

यह था पूरा मामला

आदेश में कहा गया है कि मोटर मार्ग की टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की जांच की शिकायत प्राप्त होने पर डीएम ने अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बनाई थी। इसमें वित्तीय और तकनीकी सदस्यों को भी शामिल किया गया था।

समिति ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी पकड़ी और इसे उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली के प्रावधानों के खिलाफ पाया। जांच कमेटी ने एसई गुप्ता को जांच पूरी होने तक मोटर मार्ग निर्माण से जुड़ी कार्यवाही को न करने के निर्देश दिए थे।

लेकिन विभागीय अधिकारियों ने जांच कमेटी के निर्देशों को दरिकनार करते हुए कार्य जारी रखा। मामले से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए। जांच में सहयोग न देने व निविदा प्रक्रिया में अनियमितता बरतने के मामले में दोनों इंजीनियरों को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया।

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