उत्तराखंड : अपना ही जिला लेगा नए सीएम की परीक्षा, स्थानीय लोगों की उम्मीदें होगी ज्यादा
सीमांत के लोगों को नए मुख्यमंत्री काफी उम्मीदें हैं। लोगों का कहना है कि नए सीएम भले ही वर्तमान में खटीमा विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन वह सीमांत का दर्द भली भांति जानते हैं।
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चुनावी साल में नए सीएम पुष्कर सिंह धामी को कई परीक्षाओं से गुजरना होगा, लेकिन सबसे पहले उनकी परीक्षा उनका अपना ही जिला लेगा। मानसून के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान पिथौरागढ़ जिला ही झेलता है। ऐसे में यहां के लोगों की अपेक्षा नए मुख्यमंत्री से ज्यादा होंगी। क्योंकि मूलरूप से वह जिले के डीडीहाट के हड़खोला गांव के रहने वाले हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने से यहां खुशी का माहौल है।
सीमांत के लोगों को नए मुख्यमंत्री काफी उम्मीदें हैं। लोगों का कहना है कि नए सीएम भले ही वर्तमान में खटीमा विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन वह सीमांत का दर्द भली भांति जानते हैं। पुष्कर सिंह धामी खटीमा से विधायक बनने से पहले वर्ष 2007 में कनालीछीना विधानसभा सीट से विधायक के दावेदार थे। उनके बदले उस वक्त भाजपा ने तत्कालीन ब्लाक प्रमुख शांति भंडारी को टिकट दिया था। इसके बाद पुष्कर सिंह धामी खटीमा चले गए।
उन्होंने खटीमा में अपनी पकड़ बनाना शुरू किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके समक्ष सबसे पहले आपदा से निपटने की चुनौती होगी। इसके अलावा विस्थापित लोगों को मकान दिलाना और लंबे समय से चल रही डीडीहाट जिले की मांग कर रहे लोगों की उम्मीद को पूरा करना भी उनके समक्ष एक चुनौती के रूप में ही होगा।
हड़खोला के ग्रामीण सुबह से कर रहे थे ईष्ट देव पूजा अर्चना
तीरथ सिंह रावत के सीएम पद से इस्तीफे के बाद पुष्कर सिंह धामी का नाम सीएम पद के लिए आगे चल रहा था। ग्रामीण धामी के सीएम बनाने के लिए मां भगवती और मलयनाथ स्वामी की पूजा अर्चना कर रहे थे। सीएम के चचेरे भाई गुड्डू धामी ने कहा कि पुष्कर सिंह धामी का सीएम बनना उत्तराखंड और डीडीहाट के लिए गौरव की बात है।
सीएम के ताऊ बोले इससे बड़ा गर्व का पल नहीं हो सकता
पुष्कर सिंह धामी के सीएम बनने के बाद उनके पैतृक गांव हड़खोला में खुशी की लहर है। उनके 90 वर्षीय ताऊ तेज सिंह धामी का कहना है कि यह हमारे लिए बहुत बड़े गर्व की बात है। चाचा जगत सिंह धामी और चाची आनंदी धामी और चचेरे भाई हड़खोला के ग्राम प्रधान पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष गुड्डू धामी का कहना है उनके परिवार के लिए यह गर्व का पल है। नये सीएम के नेतृत्व में पूरा प्रदेश उन्नति करेगा।
नए सीएम धामी के पैतृक गांव के लिए अब तक नहीं बनी सड़क
पिथौरागढ़। नए सीएम पुष्कर सिंह के पैतृक गांव हड़खोला डीडीहाट विधानसभा में आता है। यहां अभी तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। हड़खोला सड़क निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी हो गई है। जल्द ही अब काम शुरू हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तो उनके गांव में सड़क पहुंच जाएगी।
कुमाऊं की उपेक्षा के आरोपों से ‘पुष्कर’ के जरिये बाहर निकलने की कोशिश
राज्य में आए सियासी भूचाल में सांविधानिक संकट के चलते 115 दिनों में तीरथ सिंह रावत की विदाई के बाद भाजपा ने युवा चेहरे और खटीमा से दो बार के विधायक पुष्कर सिंह धामी पर भरोसा जताया है। पुष्कर के सहारे भाजपा ने जातिगत समीकरणों को तो साधा ही है वहीं कुमाऊं की उपेक्षा के आरोपों का भी जवाब देने की कोशिश की है।
संयोग ही कहा जाएगा कि प्रदेश की अंतरिम सरकार में 123 दिन मुख्यमंत्री रहे भगत सिंह कोश्यारी के कार्यकाल के 19 साल बाद कुमाऊं से उनके ही शिष्य पुष्कर सिंह धामी को प्रदेश की कमान मिली है। हालांकि विधानसभा चुनाव में बेहद कम समय रहने की वजह से धामी के लिए सबको साथ लेकर प्रदेश में विकास की नई इबारत लिखकर सत्ता में भाजपा का कब्जा बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगी।
राज्य गठन के समय अंतरिम सरकार में भाजपा ने गढ़वाल मंडल से वरिष्ठ नेता नित्यानंद स्वामी को मुख्यमंत्री बनाया था लेकिन 354 दिन के कार्यकाल के बाद कुमाऊं से आने वाले भगत सिंह कोश्यारी (वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल) को प्रदेश की बागडोर सौंपी गई थी। वह सिर्फ 123 दिन ही मुख्यमंत्री रह सके थे। इसके बाद भाजपा ने फिर कुमाऊं से किसी नेता को प्रदेश की बागडोर देने की हिम्मत नहीं जुटाई। वर्ष 2009 में भुवन चंद्र खंडूड़ी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के बाद वर्ष 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत और 10 मार्च 2021 को तीरथ सिंह रावत को सत्ता की चाबी सौंपी गई थी।
चारों वरिष्ठ नेता गढ़वाल से ही ताल्लुक रखते हैं। भाजपा में स्व. प्रकाश पंत, बिशन सिंह चुफाल, बंशीधर भगत जैसे दिग्गज नेताओं के लगातार जीतने के बाद भी उनको प्रदेश की कमान नहीं देने पर भाजपा पर कुमाऊं की उपेक्षा के आरोप लगते रहे थे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में कुमाऊं के चार जिलों से कोई मंत्री नहीं बनाया गया था। लेकिन तीरथ मंत्रिमंडल में पिथौरागढ़ से बिशन सिंह चुफाल और नैनीताल से बंशीधर भगत को मंत्रिमंडल में जगह देकर भाजपा ने उपेक्षा के आरोपों से बाहर निकलने की कोशिश की थी।
उस समय भी मुख्यमंत्री की दौड़ में पुष्कर सिंह धामी का नाम प्रमुखता से था। बदले सियासी हालात में तीरथ सिंह रावत को इस्तीफा देना पड़ा तो भाजपा ने युवा और जातिगत समीकरणों के आधार पर ठाकुर चेहरे पुष्कर सिंह धामी को प्रदेश की बागडोर सौंपी है। इसे भाजपा की ओर से कुमाऊं के प्रति उपेक्षा के आरोपों का जवाब देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विधानसभा चुनावों से कुछ समय पहले पुष्कर की ताजपोशी उनके लिए भी बड़ी चुनौती से कम नहीं है लेकिन भाजपा ने ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष के बाद ठाकुर मुख्यमंत्री बनाकर जातिगत समीकरणों के साथ ही कुमाऊं और गढ़वाल में सियासी संतुलन बनाने का प्रयास किया है। देखना है कि भाजपा का यह दांव जनता को कितना पसंद आता है।