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Dehradun News: जमीन हड़पने का मामला सिर्फ दीवानी नहीं, आपराधिक साजिश भी
Tue, 06 Oct 2026 01:51 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Tue, 06 Oct 2026 01:51 AM IST
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देहरादून की सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस सोसायटी निवासी मयंक अवस्थी और नई दिल्ली के शालीमार बाग निवासी राजेश ढौंडियाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदन सिंह ने जायज माना। न्यायालय ने सोमवार को निचली अदालत का चार जनवरी 2024 का आदेश रद्द कर दिया। ।
नई दिल्ली के अशोक नगर निवासी रितेश भाटिया और मीनू भाटिया ने आरोप लगाया था कि भवन निर्माण के लिए हुए अनुबंध के बाद उनकी 20 लाख रुपये की संपत्ति हड़प ली गई। पांच सितंबर 2018 को पंजीकृत अनुबंध हुआ था। इसमें छह माह के भीतर निर्माण कराया जाना था और भाटिया दंपती को 27,917 रुपये मासिक किराया मिलना था। आरोप है कि पूरी राशि लेने के बाद भी न कब्जा दिया गया, न निर्माण हुआ। पांच मार्च 2020 से किराया भी बंद कर दिया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसे दीवानी विवाद मानकर प्रार्थना पत्र खारिज किया था। इसके खिलाफ भाटिया दंपती ने निगरानी दायर की। सरकारी पक्ष ने निचली अदालत के आदेश को सही बताया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने ललिता कुमारी केस में सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध प्रकट होने पर एफआईआर दर्ज कर जांच जरूरी है। न्यायालय ने कहा कि दीवानी उपचार उपलब्ध होने से अपराध की गंभीरता खत्म नहीं होती। सामग्री में गहरी आपराधिक साजिश दिखती है। मामला पुनर्विचार के लिए मजिस्ट्रेट को लौटाया गया।
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नई दिल्ली के अशोक नगर निवासी रितेश भाटिया और मीनू भाटिया ने आरोप लगाया था कि भवन निर्माण के लिए हुए अनुबंध के बाद उनकी 20 लाख रुपये की संपत्ति हड़प ली गई। पांच सितंबर 2018 को पंजीकृत अनुबंध हुआ था। इसमें छह माह के भीतर निर्माण कराया जाना था और भाटिया दंपती को 27,917 रुपये मासिक किराया मिलना था। आरोप है कि पूरी राशि लेने के बाद भी न कब्जा दिया गया, न निर्माण हुआ। पांच मार्च 2020 से किराया भी बंद कर दिया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।
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न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसे दीवानी विवाद मानकर प्रार्थना पत्र खारिज किया था। इसके खिलाफ भाटिया दंपती ने निगरानी दायर की। सरकारी पक्ष ने निचली अदालत के आदेश को सही बताया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने ललिता कुमारी केस में सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध प्रकट होने पर एफआईआर दर्ज कर जांच जरूरी है। न्यायालय ने कहा कि दीवानी उपचार उपलब्ध होने से अपराध की गंभीरता खत्म नहीं होती। सामग्री में गहरी आपराधिक साजिश दिखती है। मामला पुनर्विचार के लिए मजिस्ट्रेट को लौटाया गया।
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