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दैवी आपदा का खतरा बढ़ा, दरक रही पूर्णागिरि धाम मार्ग की पहाड़ियां
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
Updated Sun, 11 Jun 2017 03:13 PM IST
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मां पूर्णागिरि धाम मार्ग
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मानसून नजदीक है और दैवी आपदा का खतरा भी बढ़ गया है। खतरे के मद्देनजर प्रशासन ने भी आपदा प्रबंधक की तैयारियां शुरू कर दी है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र के मार्गों पर खतरनाक स्थानों को प्रशासन ने चिन्हित तो कर लिया है, लेकिन सुरक्षात्मक कार्य शुरू नहीं किए हैं। मां पूर्णागिरि धाम मार्ग पर भी कई स्थानों पर पहाड़ी के दरकने की संभावित स्थिति से खतरा बना हुआ है।
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आपदा का दंश झेल चुके लोगों के लिए बरसात का मौसम चुनौती लेकर आता है। पर्वतीय क्षेत्रों में पहाड़ों के दरकने से आपदा की मार अधिक पड़ती है। पूर्णागिरि मार्ग पर भी कई स्थानों पर पहाड़ियों के दरकने का खतरा बना है। लादीगाड़ के पास सड़क चौड़ीकरण के लिए जेसीबी से की गई खुदाई से पहाड़ी ऐसे स्थिति में है कि वह कभी भी दरक कर मार्ग पर गिर सकती है।
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यदि पहाड़ी दरक कर राह चलते श्रद्धालुओं या फिर किसी वाहन के ऊपर गिरी तो बड़ा हादसा हो सकता है। मंदिर समिति अध्यक्ष भुवन चंद्र पांडेय ने बताया कि प्रशासन से मार्ग के खतरनाक स्थानों को चिन्हित कर समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाने की मांग की गई है, लेकिन अब तक प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए हैं।
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टनकपुर के एसडीएम अनिल चन्याल ने बताया कि आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासन गंभीर है। पूर्णागिरि समेत सभी पर्वतीय मार्गों के खतरनाक स्थानों को चिन्हित किया जा चुका है। चिन्हित खतरनाक स्थानों पर लादीगाड़ का खतरनाक स्थान भी शामिल है। लोनिवि को चिन्हित खतरनाक स्थानों पर जरूरी सुरक्षात्मक कदम उठाने को आदेशित किया गया है। खतरनाक स्थानों पर पहले से ही जेसीबी एवं पोकलैंड मशीनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।