पंजाब सियासत: ...तो क्या कैप्टन के खिलाफ देहरादून में की गई बैटिंग चन्नी को दिला गई ‘कप्तानी’
Punjab New CM Charanjit Singh Channi News: पिछले माह 25 अगस्त को जब उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान सदन का तापमान चरम पर था, उस वक्त बाहर पंजाब सरकार में खास रुतबा रखने वाले चार कैबिनेट मंत्री और तीन विधायकों ने बगावती तेवर दिखाते हुए देहरादून का रुख किया था।
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पंजाब में उठा सियासी तूफान आखिरकार चरनचीत सिंह चन्नी के नाम पर मुहर लगने के बाद शांत हो गया। कैप्टन सरकार में मंत्री रहे चन्नी उन सात नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत से मिलकर अमरिंदर सिंह की कार्यशैली की शिकायत की थी। अब सियासी फिजाओं में यह बात तैरने लगी है कि चन्नी की ताजपोशी की पटकथा देहरादून में ही लिख दी गई थी।
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पिछले महीने 25 अगस्त को जब उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान सदन का तापमान चरम पर था, उस वक्त पंजाब सरकार में खास रुतबा रखने वाले चार कैबिनेट मंत्री और तीन विधायकों ने बगावती तेवर दिखाते हुए देहरादून का रुख किया था।
तब यहां एक स्थानीय होटल में इन नेताओं की हरीश रावत के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक चली थी। इन नेताओं में सुखजिंदर रंधावा भी थे और चरनजीत सिंह चन्नी भी। उनके अलावा कैबिनेट मंत्री तिरपत राजिंदर सिंह बाजवा, सुख सरकारिया और तीन विधायक कुलवीर जीरा, बरिंदरजीत पहाड़ा, सुरजीत सिंह धीमान भी शामिल थे।
इन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह का धुर विरोधी माना जाता था। तीन घंटे बंद कमरे में चली बैठक के बाद बड़े ही रणनीतिक ढंग से कुनबे में सब ठीक है का वक्तव्य दिया गया। हालांकि हरीश रावत और चरनचीत सिंह चन्नी ने भविष्य में पंजाब में बदलाव के साथ बड़े राजनीतिक फेरबदल के संकेत भी दिए थे।
हरीश रावत शुरू से ही पंजाब के सियासी घटनाक्रम के केंद्र में थे
माना जा रहा है कि उस वक्त ही पंजाब में बदलाव की पटकथा लिख दी गई थी। इस बीच कैप्टन और बगावती तेवर दिखा रहे नेताओं को कुछ मसलों को सुलझाने के लिए समय दिया गया था, लेकिन मामला सुलझ नहीं पाया था।
कांग्रेस आलाकमान के भरोसेमंद सिपहसालार माने जाने वाले हरीश रावत शुरू से ही पंजाब के सियासी घटनाक्रम के केंद्र में थे। अंत में हरीश रावत ने ही रविवार को ट्वीट के जरिए खुद चरनजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने की जानकारी दी। उस वक्त तक सबकुछ सुखजिंदर रंधावा के पक्ष में चल रहा था।
सियासी पिच पर एक बार फिर हरीश ने दिखाया अपना हुनर
खांटी सियासतदां हरीश रावत ने रणनीतिक कौशल दिखाते हुए कैप्टन (अमरिंदर सिंह) को आउट कराकर पार्टी नेतृत्व के पांव में लंबे समय से चुभ रहा कांटा निकालने में कामयाबी हासिल की। दिग्गज अमरिंदर को सत्ता से हटा पाना इतना आसान नहीं था। वैसे उत्तराखंड में कांग्रेस के प्रचार की अगुवाई कर रहे रावत ने कांग्रेस आला कमान से गुजारिश की थी कि उन्हें पंजाब के प्रभार से मुक्त कर दिया जाए। लेकिन उनके व्यापक सियासी अनुभव को देखते हुए आला कमान ने इसकी इजाजत नहीं दी। पंजाब के सियासी मसले को सुलझाने का इनाम भी उन्हें मिल सकता है।