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शिक्षा विभाग की समस्याओं का निकालूंगा समाधान: सीएम रावत
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 27 Aug 2016 01:08 PM IST
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हरीश रावत
- फोटो : AmarUjala
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अमर उजाला द्वारा की गई पहल में आज पेश किए जा रहे हैं जनता द्वारा उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत से पूछे गए कुछ और सवालों के जवाब...
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सवाल- सुरेंद्र सिंह बोहरा, हल्द्वानी: NGO के माध्यम से रखे गए उम्रदराज शिक्षा आचार्यों को प्रमोट कर D.L.Ed प्रशिक्षण कराकर अवैध रूप से प्राथमिक अध्यापक के पद में नियुक्ति देना क्या नियमानुसार है?
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जवाब- नियुक्ति प्रक्रिया में नियम आड़े आ रहे हैं, यह समस्या मुझे विरासत में मिली है। शिक्षा विभाग की जटिल समस्याओं के विधि सम्मत समाधान का प्रयास करूंगा।
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सवाल- सुमन ढौडियाल, गढ़वालः अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत पीटीए शिक्षक सात सालों से कार्यरत हैं, पर इनके नियमितीकरण के लिए अब तक सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है?
जवाब- पांच सितंबर 2003 के पश्चात तथा 18 अक्तूबर 2011 तक जिन पीटीए शिक्षकों को राजकोष से मानदेय दिया जा रहा है, ऐसे कुल 461 शिक्षकों की तदर्थ नियुक्ति किए जाने का प्रस्ताव शासन में विचाराधीन है। तत्पश्चात ही उनका विनियमितीकरण किया जा सकेगा, कार्रवाई में तेजी लाई जा रही है।
सवाल- पूरण कर्णपाल (50 से अधिक लोगों ने यह सवाल किया) : बीएड शिक्षा विशारद की डिग्री साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद (प्रयाग) के द्वारा दी जाती है। जो केंद्रीय हिंदी निदेशालय एमएचआरडी से संबद्ध संस्था है। लेकिन वर्तमान में उपरोक्त डिग्री धारकों को शिक्षक चयन प्रकिया से बाहर कर दिया गया है। शिक्षा विशारद संग सौतेला व्यवहार क्यों?
जवाब- बीएड शिक्षा विशारद की डिग्री यूजीसी से मान्यता प्राप्त नहीं है। प्रदेश में यूजीसी से मान्यता प्राप्त बीएड डिग्री धारकों को ही शिक्षक नियुक्ति किए जाने का प्रावधान है। फिर भी परीक्षण करा रहे हैं।
सवाल- दयानंद बेनवाल, कुमाऊं: सरकारी विभागों में कार्यरत संविदा, आउटसोर्सिंग, तदर्थ, दैनिक वेतनभागी कर्मचारियों की नियुक्ति किस तरह से हुई है। विज्ञप्ति कहां प्रकाशित की गई, क्या ये नियुक्तियां असंवैधानिक है। सरकार इन्हें क्यों नियमित करना चाहती है? इसी तरह 6 फरवरी 2003 के शासनादेश के अनुसार संविदा/आउटसोर्सिंग/ तदर्थ/दैनिक वेतनभागी कर्मचारी विभाग द्वारा नियुक्त नहीं किये जा सकते। तो कैसे ये इतनी सारी नियुक्तियां की गयी है? पिछले दो साल से आप हर जगह कहते हैं कि हम 50 से 70 हजार नियुक्तियंा देंगे। अब कह रहे हंै कि 30 हजार देंगे। उसमें से 16 हजार दी जा चुकी है। बाकी बची 14 हजार में भी वे शायद संविदा/आउटसोर्सिंग/ तदर्थ/दैनिक वेतनभागी कर्मचारियों को फिट करना चाह रहे हैं। तो क्या बेरोजगार जिसके पास कोई सिफारिश नहीं है उसे नौकरी नहीं मिलेगी?
जवाब- विरासत में कई जटिलताएं हमें प्राप्त हुई हैं। अतीत में की गई गलती की सजा बेरोजगारों को नहीं दी जा सकती है। न्यायसंगत व विधिसम्मत हल का प्रयास कर रहे हैं।
सवाल- योगेंद्र सती, पोखरीः बीएड टीईटी के 500 नए पद स्वीकृत हुए थे। कहा गया थ्ाा कि 1200 शिक्ष्ाक और नियुक्त होंगे पर अभी तक इस बारे में कुछ नहीं हुआ?
जवाब- बीएड टीईटी योग्यता प्राप्त कुल 1200 शिक्षकों की नियुक्ति प्रदेश के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में की जा चुकी है। एनसीटीई नई दिल्ली द्वारा ऐसे शिक्षकों को नियुक्त किए जाने की समय सीमा 31 मार्च 2016 तक थी। यदि समय सीमा बढ़ाई जाएगी तो शेष 500 शिक्ष्ाकों की नियुक्ति प्रक्रिया की संभावना हो सकती है। इसके अलावा भी संभावना तलाश रहे हैं।
सवाल- इंद्रा सिंह: उत्तराखंड के एक लाख से ज्यादा बीएड बेरोजगारों के लिए आपके पास क्या प्लान है?
जवाब- लगभग 3090 एलटी के पदों तथा 1213 प्रवक्ता के पदों पर चयन प्रक्रिया गतिमान है। शेष रिक्त पदों पर भी नियुक्ति प्रकिया आरंभ की जा रही है।
सवाल- विनोद रावत (राज्य अलग-अलग हिस्सों से कई लोगों ने यह सवाल किया): शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए BRP CRP का चयन किया गया है। ये नियुक्तियां आपके द्वारा क्यों रोकी गई हैं, जबकि हाईकोर्ट द्वारा नियुक्ति आदेश जारी किया गया है।
जवाब- माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हुए समाधान खोजने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कई पाठकों ने एक ही विषय पर सवाल पूछे हैं, लिहाजा उनके जवाब अलग-अलग नहीं दिए जाएंगे। व्यक्तिगत सवालों के संबंध में सीएम कार्यालय द्वारा सीधे अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे सवाल इस शृंखला में शामिल नहीं होंगे। इस शृंखला से पाठकों की अपेक्षाएं बहुत बढ़ गईं हैं। हमारा दोबारा अनुरोध है कि इस शृंखला से बहुत ज्यादा उम्मीद न लगाएं कि सीएम आपका सवाल सुनेंगे और तत्काल हल भी निकल आएगा। हमारा वादा आपकी बात सीएम तक और उनसे मिले जवाब को अमर उजाला के जरिए आप तक पहुंचना है। हमें उम्मीद है कि कुछ लोगों को राहत मिलेगी, मगर ऐसा नहीं लगता कि रातों-रात सब कुछ बदल जाएगा।