फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   public question to uttarakhand cm harish rawat

जनता के सवालों पर उत्तराखंड सीएम रावत ने दिए ये जवाब

Wed, 24 Aug 2016 10:17 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 24 Aug 2016 10:17 AM IST
विज्ञापन
public question to uttarakhand cm harish rawat
हरीश रावत - फोटो : अमरउजाला

उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत से जनता द्वारा पूछे गए सवालों की श्रृंखला में आज कुछ और जवाब पेश हैं।

विज्ञापन


कई पाठकों ने एक ही विषय पर सवाल पूछे हैं, लिहाजा उनके जवाब अलग-अलग नहीं दिए जाएंगे। व्यक्तिगत सवालों के संबंध में सीएम कार्यालय द्वारा सीधे अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है। वे सवाल इस शृंखला में शामिल नहीं होंगे। इस शृंखला से पाठकों की अपेक्षाएं बहुत बढ़ गईं हैं। हमारा दोबारा अनुरोध है कि इस शृंखला से बहुत ज्यादा उम्मीद न लगाएं कि  सीएम आपका सवाल सुनेंगे और तत्काल हल भी निकल आएगा। हमारा वादा आपकी बात सीएम तक और उनसे मिले जवाब को अमर उजाला के जरिए आप तक पहुंचना है। हमें उम्मीद है कि कुछ लोगों को राहत मिलेगी, मगर ऐसा नहीं लगता कि रातों-रात सब कुछ बदल जाएगा।

मोहन गिरी, थराली-चमोली : सीएम साहब, सरकार गांवों से पलायन रोकने में असफल रही है, अगर पहाड़ी क्षेत्रों में ही शहर विकसित किए जाए और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाए तो पलायन रुकेगा, क्या कहना है आपका?
विज्ञापन


सीएम : मेरी सरकार ने कई क्षेत्रों को नगर पालिका घोषित किया है। भराड़ी सैन (गैरसैण) सहित कई आबादी वाले क्षेत्रों को भी नगर क्षेत्रों में घोषित किया जा रहा है। मेरा प्रयास है कि हम ऐसे क्षेत्रों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करें। पलायन रोकने को कृषि, बागवानी से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहें हैं। ईको टूरिज्म, होम स्टे, योगा को पर्यटन से जोड़ा जा रहा रहा है। अपने शिल्प, हस्तकला को भी बाजार से जोड़ रहे हैं।  इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मैने आग्रह किया है कि सीमांत क्षेत्रों में विशेष योजनाएं, संचार, सड़क हवाई अड्डे, दस्तकारी आधारित उत्पादों को 40 प्रतिशत विशेष बोनस देकर लाभदायक बनाएं। अर्द्धसैनिक बलों में रियासत दें। साथ ही महिला सहायता समूह, महिला मंगल दलों को विकास में भागीदार बनाया जा रहा है। अगले तीन वर्ष में रिवर्स पलायन हो यह प्रयास है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


अनीश अहमद, गैरसैण : जॉन जे हूकर का कहना है कि ‘जब तक सरकार और उसके अधिकारी किसी भी तरह की रिश्वतखोरी चलने देंगे, तब तक न्याय नहीं होगा।’ सीएम साहब आपका इसके बारे में क्या कहना है, जबकि प्रदेश में कई स्तर पर भारी भ्रष्टाचार किसी से छिपा नहीं है?
सीएम : भ्रष्टाचार पर मेरी सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति है। लोकायुक्त व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया गतिमान है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए सतर्कता विभाग काम कर रहा है। बेनामी संपत्ति कानून, इस दिशा में कार्य करेगा। कार्रवाई भी की गई है। 

हरपाल सिंह, नेगी रामनगर : हमारे ग्राम नया झिरना रामगर नैनीताल को बसे 21 साल बीत चुके हैं। लेकिन ग्रामीणों को अभी तक अपनी भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला है। गांव में अब भी बंदोबस्त का काम पूरा नहीं हो पाया है। कानूनगो जब्बार हुसैन व लेखपाल जाकिर हुसैन गांव के लोगों को गुमराह कर लाखों रुपया कमाकर चले गए, लेकिन ग्रामीणों की भूमि की कमी-बेसी पूरी नहीं हो पाई है। आज भी जांच नैनीताल जिलाधिकारी के अधीन है। कब तक ग्रामीणों की समस्या का समाधान हो पाएगा?
सीएम : कब्जाधारक को वर्ग तीन व वर्ग चार की भूमि का मालिकाना हक देने के शासनादेश जारी हो गए हैं। कार्रवाई प्रभावी रूप से लागू की जा रही है। कहीं कुछ कमी रही तो बाधा दूर करेंगे।

सियाराम, हरिपुर कला, देहरादून : सीएम साहब मैं दिव्यांग हूं, मैं जानना चाहता हूं, कि इस महंगाई में सिर्फ 800 रुपये महीना दिया जाता है। नौकरी नहीं है, हमारे ऐसे दिव्यांगों के लिए कुछ आपने सोचा है?
सीएम : दिव्यांगों की पेंशन बढ़ाने के साथ-साथ कई योजनाए लागू की जा रही हैं।

सूरज सिंह, कुमाऊं : आपने उत्तराखंड बोर्ड 12वीं में 80 प्रतिशत से ज्यादा नंबर लाने वाले स्टूडेंट को लैपटॉप देने की घोषणा की थी लेकिन अब इस बारे में कोई चर्चा नहीं हो रही है?
सीएम : बजट केंद्र में होने के कारण नहीं हो पाया था। अब योजना हेतु धन स्वीकृत हो गया है, योजना लागू की जा रही है। 

दीवान सिंह, गढ़वाल : गढ़वाल में भी हाईकोर्ट की एक बेंच स्थापित की जाए। नैनीताल काफी महंगा शहर है, ऐसे में गढ़वाल के सुदूर क्षेत्र से आने वाले लोग आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान होते हैं?
सीएम : हाईकोर्ट की बेंच की स्थापना केवल राज्य सरकार नहीं, अपितु  माननीय न्यायालय के परामर्श से ही होता है। सर्वानुमति होने पर ही ऐसा कदम उचित होगा। 

फरमान अहमद, हरिद्वार : दिव्यांग कोटे से पशुधन प्रसार अधिकारी के पद पर टिहरी में कार्यरत हूं। शासनादेश है कि जो दिव्यांग हैं, उन्हें गृह जनपद में नियुक्ति मिलेगी। पर मेरे साथ ऐसा नहीं है। ऐसे में इस तरह के झूठे शासनादेश का क्या फायदा? 
सीएम : दिव्यांगों के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। दिव्यांग आयोग भी बनाया जा रहा है, जिससे उनकी समस्याओं का निस्तारण जल्द से जल्द हो सके। शासनादेश को प्रभावी रूप से लागू करेंगे। 


रविशंकर : उत्तराखंड पुलिस में डीएसपी की लंबाई 168 सेंटीमीटर तय है, पर आईपीएस और अदर्स में 165 सेंटीमीटर है। जबकि उत्तराखंड में पहाड़ हैं और यहां औसत लंबाई भी कम है। ऐसे में यहां पुलिस भर्ती में लंबाई क्या 160 सेंटीमीटर नहीं की जा सकती है। अगर नहीं हो सकती है तो कम से कम आईपीएस के लिए तय 165 सेंटीमीटर लंबाई ही तय कर दी जाए?
सीएम : परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed