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जनजातियों ने हक हकूकों के लिए सचिवालय घेरा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 11 Nov 2013 11:57 PM IST
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राज्य की पांचों जनजातियों ने उत्तराखंड अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति की अगुवाई में विभिन्न मागों को लेकर ढोल दमऊ के साथ सचिवालय कूच किया। जनजातियों के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए मांगों की सुनवाई न होने पर जिला मुख्यालयों पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।
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सीएम को भेजा ज्ञापन
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। सोमवार दोपहर एक बजे विभिन्न मांगों को लेकर राज्य के बोक्सा, भोटिया, थारू, जौनसारी व वनराजी जनजातियों के सैकड़ों लोग परेड ग्राउंड में जुटे और जुलूस के रूप में सचिवालय पहुंचे। साचिवालय के बाहर पुलिस ने बैरीकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। इससे बौखलाए प्रदर्शनकारी वहीं बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
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जननातियों के साथ छल करने का आरोप
इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जनजातियों के साथ छल किया है। मुख्यमंत्री ने सितारगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए जिन घोषणाओं के साथ वोट मांगे थे वे भी पूरे नहीं किए गए। इससे बड़ा क्या धोखा हो सकता है। उन्होंने कहा कि जनजातियों की चुनिंदा मांगें हैं और अगर उन पर ध्यान भी ध्यान नहीं दिया गया तो कांग्रेस सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
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समस्याओं के लिए गंभीर नहीं
समिति के संरक्षक पूर्व आईएएस एसएस पांगती ने कहा राज्य की सीमाओं की रक्षा जनजातियां कर रही हैं। सरकार को जनजातियों की समस्याओं पर गंभीर होना चाहिए। इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष गोपाल सिंह राणा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्र सिंह ग्वाल, महासचिव रणवीर सिंह तोमर, आदि मौजूद रहे।