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Dehradun News: प्रो. रमाकांत पांडेय बने संस्कृत विवि के कुलपति
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-वर्तमान में केंद्रीय संस्कृत विवि जयपुर में निदेशक पद पर तैनात हैं प्रो. पांडेय
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रो. रमाकांत पांडेय उत्तराखंड संस्कृत विवि के नए कुलपति होंगे। राज्यपाल ने बुधवार को उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया। यह नियुक्ति तीन साल या आगामी आदेश तक के लिए की गई है।
राज्यपाल एवं विवि कुलाधिपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने 23 अगस्त के आदेश को अतिक्रमित करते हुए उत्तराखंड संस्कृत विवि में लागू उत्तर प्रदेश राज्य विवि अधिनियम 1973 की धारा-12 की उपधारा-2 के अधीन प्रो. रमाकांत पांडेय को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अगले तीन साल तक के लिए कुलपति नियुक्त कर दिया है।
प्रो. पांडेय वर्तमान में केंद्रीय संस्कृत विवि जयपुर परिसर में निदेशक पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें बतौर प्रोफेसर 10 वर्ष और बतौर सीनियर प्रोफेसर चार वर्ष का अनुभव है। उनके मार्गदर्शन में 25 पीएचडी हो चुकी हैं और आठ छात्र पीएचडी कर रहे हैं। प्रो. पांडेय की 65 पुस्तकें, 150 शोध पत्र और 22 साहित्यिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने सात शोध पत्रिकाओं का संपादन किया है। उनकी 27 पुस्तकें विभिन्न विवि में पढ़ाई जा रही हैं। वह 86 राष्ट्रीय, 15 अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी और 57 कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रो. रमाकांत पांडेय उत्तराखंड संस्कृत विवि के नए कुलपति होंगे। राज्यपाल ने बुधवार को उनकी नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया। यह नियुक्ति तीन साल या आगामी आदेश तक के लिए की गई है।
राज्यपाल एवं विवि कुलाधिपति ले. जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने 23 अगस्त के आदेश को अतिक्रमित करते हुए उत्तराखंड संस्कृत विवि में लागू उत्तर प्रदेश राज्य विवि अधिनियम 1973 की धारा-12 की उपधारा-2 के अधीन प्रो. रमाकांत पांडेय को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अगले तीन साल तक के लिए कुलपति नियुक्त कर दिया है।
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प्रो. पांडेय वर्तमान में केंद्रीय संस्कृत विवि जयपुर परिसर में निदेशक पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें बतौर प्रोफेसर 10 वर्ष और बतौर सीनियर प्रोफेसर चार वर्ष का अनुभव है। उनके मार्गदर्शन में 25 पीएचडी हो चुकी हैं और आठ छात्र पीएचडी कर रहे हैं। प्रो. पांडेय की 65 पुस्तकें, 150 शोध पत्र और 22 साहित्यिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने सात शोध पत्रिकाओं का संपादन किया है। उनकी 27 पुस्तकें विभिन्न विवि में पढ़ाई जा रही हैं। वह 86 राष्ट्रीय, 15 अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी और 57 कार्यशाला में शामिल हो चुके हैं।
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