पति शहीद हुए तो खुद आई सेना में, बनी अफसर
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पति की शहादत के बाद समाज की बेड़ियां और परंपरागत सोच को दरकिनार कर सेना की राह चुनने वाली लेफ्टिनेंट प्रिया सेमवाल को उत्तराखंड सरकार की ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
प्रिया को यह पुरस्कार नौ मार्च को सचिवालय मीडिया सेंटर में दिया जाएगा। इसकी घोषणा उस वक्त की गई थी जब प्रिया ने सेना में कमीशन प्राप्त किया था।
20 जून 2012 को अरुणाचल में सेना के ऑपरेशन ऑर्किड में दून निवासी 14 राजपूत रेजीमेंट के नायक अमित शर्मा शहीद हो गए थे। उनकी शहादत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया था।
उनकी पत्नी प्रिया के लिए यह वक्त इसलिए चुनौतीपूर्ण था क्योंकि उन पर बेटी ख्वाहिश की जिम्मेदारी आ गई थी। बावजूद इसके प्रिया ने सेना में जाने का फैसला किया।
बतौर लेफ्टिनेंट हुईं पासआउट
गांव धोरण निवासी प्रिया के परिवार और गढ़ी कैंट स्थित ससुराल पक्ष के लिए प्रिया का यह फैसला बहुत अटपटा था, लेकिन बाद में उन्होंने इसका समर्थन किया।
15 मार्च 2014 को प्रिया ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी(ओटीए) चेन्नई से बतौर लेफ्टिनेंट पासआउट हुईं। तभी राज्य सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार देने की घोषणा की थी।
शनिवार को ले. प्रिया के भाई प्रवेश सेमवाल को इस संबंध में फोन पर सूचना दी गई कि नौ मार्च को सचिवालय मीडिया सेंटर में ले. प्रिया को यह अवार्ड दिया जाएगा।
संकल्प बना शक्ति
बरेली में तैनात ले. प्रिया सेमवाल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सेना की राह आसान नहीं थी। कड़े प्रशिक्षण के बाद लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
खुद को साबित करने के अलावा वे महिलाओं के प्रति समाज की परंपरागत सोच को बदलना चाहती थीं। इसी संकल्प के साथ उन्होंने हर चुनौती का सामना किया।