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निजी हित के लिए हो रहा निजीकरण

Thu, 26 Sep 2013 11:14 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 26 Sep 2013 11:14 AM IST
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Privatization of the transport department

देहरादून में इन दिनों परिवहन विभाग में निजीकरण का जोर है। आरोप है कि यह सब किसी को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

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पढ़ें, सरकारी-प्राइवेट बसों के चक्कर में पिस रहे यात्री

पहले आरटीओ के मुख्य कार्योँ को निजी कंपनी को आउट सोर्स किया गया उसके बाद रोडवेज के कमाऊ रूट पर निजी बसें चलाने की अनुमति दी गई। सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर कौन है जो कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसे कदम उठा रहा है। सूत्र बताते हैं कि दोनों ही फैसलों के लिए बड़ी डील हुई है।
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आरटीओ में लाइसेंस बनाने और रजिस्ट्रेशन का काम आउटसोर्स किया जाना है। इस फैसले से विभाग के कर्मचारी परेशान हैं। वह सवाल करते हैं कि जिस कार्य से विभाग राजस्व जुटा रहा था उसे आउटसोर्स क्यों किया जा रहा है? इस फैसले के खिलाफ विभागीय कर्मचारियों में गुस्सा है।
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कुछ दिन पहले किया था तय
इसी तरह राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में कुछ दिन पहले तय किया गया कि दून-नैनीताल, हरिद्वार- करनाल और हरिद्वार-पानीपत रूट पर प्राइवेट बस ऑपरेटरों को परमिट दिया जाए। तीनों रूटों पर 15 परमिट जारी भी कर दिए गए। सूत्र बताते हैं कि ये तीनों रूट रोडवेज के लिए कमाऊ थे। विभाग के इस फैसले से भी रोडवेज के कर्मचारी हैरान हैं। वह विरोध पर उतर आए हैं।


सूत्र बताते हैं कि चहेती कंपनी और बस ऑपरेटरों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, दोनों ही विभागों के कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के राज्य महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि हम किसी भी हाल में निजी बसों को आईएसबीटी से संचालित नहीं होने देंगे।

आरटीओ में लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करने के कार्यों को पीपीपी मोड पर देने का मामला हमारे स्तर का नहीं है। शासन में पॉलिसी बनाई जाती है और उसी का मसला है। हमें तो शासन की नीति को लागू करना होता है।
- दिनेश चंद्र पठोई, आरटीओ

हम एसटीए के आदेश के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। हमने पहले भी इसका विरोध किया था। जो रूट कमाऊ थे, उन्हें निजी हाथों में दे दिया गया।
- दीपक जैन, महाप्रबंधक (परिचालन)

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